फर्रुखाबाद। बिना ड्यूटी के सिपाही का साढ़े तीन वर्ष तक वेतन निकलने के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र के खिलाफ चार्जशीट लगना तय है। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी। विवेचक ने सिपाही नरेश समेत दस पुलिसकर्मियों की चरित्र पंजिका कब्जे में ले ली है। इनको विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हस्ताक्षर मिलान के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आते ही चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
जनपद कानपुर के थाना शिवराजपुर के गांव कपूरपुर निवासी सिपाही नरेश सिंह यादव साढ़े तीन वर्ष तक गायब रहा। इस दौरान वेतन निकलता रहा था। कुल 17 लाख रुपये वेतन निकल गया। 14 दिसंबर 2019 को सिपाही की पत्नी सीमा ने पति की लंबी बीमारी से मौत होने की सूचना विभाग में दी। तब पूरा मामला खुला।
एएसपी की जांच रिपोर्ट मिलने पर पुलिस लाइन के कैश पटल प्रभारी अशोक शुक्ला, मुंशी शाहिद व तत्कालीन गणना मोहर्रिर कोमल यादव को एसपी ने निलंबित कर दिया था। तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक महमूद ने तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत के खिलाफ सिपाहियों की चरित्र पंजिकाओं में उनके बिना आए रिपोर्ट लगाकर फर्जी हस्ताक्षर करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
इसकी जांच दरोगा दिनेश चंद्र यादव कर रहे हैं। विवेचक ने सिपाही नरेश के अलावा नौ अन्य सिपाहियों की चरित्र पंजिकाएं कार्यालय से कब्जे में ले ली हैं। शुक्रवार को एएसपी त्रिभुवन सिंह ने मुकदमे में अब तक मिले साक्ष्यों के बारे में विवेचक दिनेश चंद्र यादव से जानकारी ली।
विवेचक ने बताया कि सभी दस चरित्र पंजिकाओं में वरिष्ठ लिपिक के हस्ताक्षर के मिलान के लिए उनको विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आते ही चार्जशीट दाखिल कर गिरफ्तारी की जाएगी। प्रेमचंद्र की इन दिनों तैनाती पीएसी के मुख्यालय लखनऊ में है। प्रेमचंद्र ने बताया कि गिरफ्तारी पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।