पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में किसान सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने अच्छी खेती करने वाले 60 किसानों को शाल उढ़ाकर और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
समारोह में जिलाधिकारी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन परिचय से किसानों को अवगत कराया। मुख्य विकास अधिकारी एनपी पांडेय ने कहा कि खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होने की अधिकांश किसान शिकायतें करते हैं।
किसान मृदा परीक्षण कराकर जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करें ताकि मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम न हो सके। आलू, लहसुन, केला, फूलगोभी, प्याज, तरोई और अमरूद की बेहतर फसल करने वाले 15 किसानों को कृषि तकनीकी प्रबंध अभिकरण योजना के तहत जिलाधिकारी ने शाल उढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इसके साथ ही गेहूं, मक्का, उरद, सरसों की अच्छी फसल करने वाले 15 किसान, पशुपालक विभाग की ओर से 15 और गन्ना विभाग की ओर से 15 किसानों को सम्मानित किए जाने के लिए चयन किया गया। इन सभी किसानों को डीएम ने सम्मानित किया।
इन सभी किसानों के अनुसार प्रथम और द्वितीय श्रेणी के किसान को पुरस्कार में दी जाने वाली रकम को बैंक खाते में सीधे भेजी गई है। कृषि विभाग व अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर कलेक्ट्रेट में जिला पूर्ति कार्यालय के बाहर हवन कर आहुतियां दीं। संगठन के जिलाध्यक्ष रामनिवास शाक्य ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने ऋण निवृत्ति बिल पास कराकर लाखों किसानों को ऋण मुक्त किया था।
1 जुलाई को उत्तर प्रदेश विधान सभा में जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू कर जमींदारी प्रथा को समाप्त किया। मार्च 1953 में पटवारी व्यवस्था की जगह लेखपाल व्यवस्था लागू कर किसानों को पटवारी के शिकंजे से मुक्ति दिलाई।
इसके अलावा किसानों के हित के लिए कई कार्य किए। इसका किसानों का लाभ्ा मिला। इस दौरान शिव कुमार कटियार, राजू शाक्य, गंगा देवी, अरुण सक्सेना, धर्मेंद्र कुमार, अनिल प्रकाश, सुनील गुप्ता, राधेश्याम, जबर सिंह, द्रोण सिंह, मनोज कुमार शाक्य, मीना सिंह, स्नेहलता, रामसिंह मथुरिया और आरडी कुशवाहा समेत कई लोग मौजूद रहे।