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सपा नेता के स्कूल में रखे मिले ट्रांसफार्मर और तार

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गांव सिरौली स्थित स्कूल के कक्ष में रखे ट्रांसफार्मर। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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नवाबगंज। जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम सदर ने सीओ और पुलिस फोर्स के साथ नवाबगंज क्षेत्र स्थित सपा नेता के स्कूल में दबिश दी। ताले तोड़वाकर कमरे चेक किए तो कई ट्रांसफार्मर, तार व अन्य सामग्री मिली। एसडीएम ने स्कूल के कमरों को सील करा दिया। जेई की तहरीर पर सपा नेता के खिलाफ नवाबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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एसडीएम सदर संजय सिंह सोमवार को सीओ मोहम्मदाबाद राजवीर सिंह व पुलिस फोर्स को लेकर सिरौली स्थित शोभाराम पब्लिक स्कूल में दबिश दी। यह स्कूल सपा अधिवक्ता सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज यादव का है। टीम ने गेट का ताला तुड़वा कर कमरों की जांच की।
कमरों में 25 केवीए, 10केवीए और 16 केवीए के कई ट्रांसफार्मर, बंच केबल, पीसीसी पोल, तार समेत अन्य विद्युत सामग्री भारी मात्रा में रखी मिली। एक्सईएन ग्रामीण सुरेंद्र कुमार, एक्सईएन कायमगंज खानचंद्र भी वहां पहुंच गए। उन्होंने विद्युत सामग्री का जायजा लिया।
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स्कूल में मिले नगला दुली निवासी सुधीर कुमार ने पूछताछ में बताया कि यह सामग्री सपा नेता पंकज यादव की है। वह बिजली विभाग में ठेकेदार भी करते रहे हैं। वह ही इसके वैध और अवैध होने की जानकारी दे सकते हैं। यह स्कूल भी सपा नेता का है। एसडीएम ने स्कूल के कमरों को सील करा दिया। अवर अभियंता दीपक कुमार ने सपा नेता पंकज यादव के खिलाफ नवाबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एक्सईएन ग्रामीण सुरेंद्र कुमार ने बताया कि स्कूल दो मंजिला बना है। इसमें नीचे और ऊपर मंजिल पर पांच-पांच कमरे बने हैं। ऊपर की मंजिल के एक और नीचे के चार कमरों में विद्युत सामग्री भरी मिली है। इस सामग्री का वहां मौजूद सुधीर कुमार कोई प्रपत्र नहीं दिखा पाए।
एसडीएम संजय सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश जांच की गई है। जांच में स्कूल में भारी मात्रा में विद्युत सामग्री डंप मिली है। जेई दीपक कुमार की तहरीर पर थाने में विद्युत अधिनियम की धारा 36 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
कितने ट्रांसफार्मर मिले...मुकदमे में नहीं है जिक्र
दर्ज कराए मुकदमे में जेई की ओर से सपा नेता के स्कूल में मिले ट्रांसफार्मरों की संख्या भी स्पष्ट नहीं की गई है, जबकि ट्रांसफार्मरों की गिनती आसानी से हो सकती है। पत्रकारों ने इस बारे में जानकारी करनी चाही तो कुछ बताया भी नहीं गया। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि आखिर अधिकारी स्कूल में मिली सामग्री के बारे में जानकारी क्यों नहीं दे रहे हैं।
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