केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम का छापा
फर्रुखाबाद। गंगा में कारखानों का पानी बहाए जाने का सच परखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को छापा मारा। 11 कारखाने चेक किए। इस दौरान छपाई कारखाना संचालकों में हड़कंप मचा रहा। दिन भर कारखाने बंद रहेे। अधिकांश में ईटीपी प्लांट खराब अथवा बंद मिले। कागजात दिखाने में भी काफी हीलाहवाली की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली ने कारखानों का सच परखने के लिए टीम भेजी है। इसमें मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सिराज आलम, शोध छात्र मन्नू यादव, पीयूष त्रिपाठी शामिल हैं। टीम ने कानपुर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुश्रवण सहायक बीएस द्विवेदी को साथ लिया। टीम को 11 कारखानों की जांच करनी थी। टीम सबसे पहले अंगूरीबाग स्थित पांडेय एंड संस के कारखाने में पहुंची।
यहां काफी देर में गेट खोला गया। यहां ईटीपी (इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) खराब पाया गया। इसके बाद टीम जटवारा जदीद स्थित आरएस क्रिएशन पहुंची। यहां कारखाने के मालिक दिल्ली में बताए गए। गार्ड ने कारखाना बंद बताया। इस पर टंकियों में मिले पानी का नमूना लिया गया। यही नहीं टीम के मुन्नू यादव ने मोबाइल से ऑनलाइन फोटोग्राफ, वीडियो समेत कई बिंदुओं पर जांच की।
हालांकि टीम को किसी तरह के कागजात नहीं दिखाए जा सकेे। इसके अलावा टीम के सदस्य गंगा दरवाजा, चांदपुर समेत 11 कारखानों में जांच करने पहुंचे। डॉ. सिराज आलम ने बताया कि जांच का मुख्य कारण गंगा के जल को शुद्ध रखना है। किसी भी कारखाने का प्रदूषित जल गंगा में न पहुंचे इसे सुनिश्चित करने के लिए टीम को भेजा गया है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से जिन कारखानों में जांच के लिए लिस्ट मिलती है, उन्हीं की जांच करते हैं।
कुटीर उद्योग को बंद कराने की साजिश
वस्त्र छपाई कुटीर उद्योग सेवा संस्थान के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा ने कहा कि बंदी के दिनों में टीमें छापा मारती हैं। अब तो जिस दिन खुला है, उस दिन भी टीम जांच कर रही है। यह कुटीर उद्योग को बंद कराने की साजिश है। वस्त्र छपाई उद्योग से लाखों लोगों की रोजी-रोटी चलती है। कहा कि सीईटीपी (कॉमन इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगवाएं, तो बाधा मुक्त प्लांट चल सकें। कहा कि कारखाने कैसा पानी छोड़ते हैं, यह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भलीभांति जानता है।