फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की सेंट्रल लैब का रिपोर्टिंग कंप्यूटर फुंकने से दिक्कतें खड़ी हो गईं। जांच रिपोर्ट लेने पहुंचे मरीजों, तीमारदारों को घंटों इंतजार के बाद भी टालमटोल की गई तो लोगों ने हंगामा कर दिया। धक्का मुक्की होते देख समझाने पहुंचे कर्मियों की तीमारदारों से नोकझोंक हुई।
लोहिया अस्पताल की सेंट्रल लैब की व्यवस्थाएं सुधार नहीं पा रही हैं। तीन दिन पहले बैटरी खराब होने से पूरी लैब में काम बंद रहा। उसी दौरान जांच रिपोर्ट का प्रिंट देने वाला कंप्यूटर फुंक गया। इससे काउंटर को बंद कर दिया गया। ऐसे में शनिवार सुबह से ही नमूना देने और दो दिन की जांच रिपोर्ट लेने वाले मरीजों व तीमारदारों की भीड़ जमा हो गई।
नमूना काउंटर पर ही जांच रिपोर्ट भी देने वाले पहुंच गए। कर्मियों ने रिपोर्ट का प्रिंट निकालने के लिए मरीजों से पर्चे जमा कर लिए, लेकिन एक-एक घंटे तक रिपोर्ट नहीं दी। यही नहीं ब्लड नमूने देने वाले महिला व पुरुष मरीजों की भी लंबी कतारें लग गईं। इसी दौरान कई रिपोर्ट लेने वाले भी खड़े हो गए। इस पर धक्का मुक्की होने लगी। कुछ ही देर में लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।
चीख सुनकर आए कर्मियों ने शांत करने का प्रयास किया, तो तीमारदारों की जमकर नोकझोंक हुई। मरीजों ने आरोप लगाया कि अपनों के जल्दी काम किए जाते हैं, जबकि हम लोग घंटों से लाइन में लगे हैं। कर्मचारी तेजी से काम करने की बजाय काउंटर से उठ जाते हैं। लिहाजा घंटों लाइन में लगे मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतें होती हैं।
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एक फीट की खिड़की बनी मुसीबत
नमूना देने वाले महिला-पुरुष मरीजों के लिए जो कमरा बनाया गया है, उसमें एक फीट की खिड़की है। गैलरी भी पांच फीट चौड़ी है। यहीं से दवाई लेने वाले मरीजों का निकलना होता है और यहीं पर नमूना देने वाले महिला-पुरुषों की लाइनें लगती हैं। पर्ची कटवाने में मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
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गैलरी में पंखे न होने से गर्मी में बेहाल रहते मरीज
जिस गैलरी में नमूना लेने के लिए लाइन लगवाई जाती हैं, वहां पंखों की भी कोई व्यवस्था नहीं है। एकमात्र बैंच पर तीन मरीज बैठ सकते हैं। पंखा न होने और संकरी गैलरी में भीड़ के चलते मरीज और तीमारदार गर्मी में बेहाल रहते हैं। इस ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है।
कंप्यूटर मरम्मत कराने भेजा है। शाम तक सही होकर आ जाएगा। नमूना के लिए ठीक स्थान को देखा जा रहा है। फिलहाल लैब के पास में ही बना दिया है। कोशिश है कि मरीजों को दिक्कत न हो। - डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस लोहिया पुरुष अस्पताल