‘पांचाल जल संचयन प्रोजेक्ट’ के तहत जनपद में बड़े स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाए गए। इस प्रोजेक्ट पर प्रदेश में सबसे अच्छा काम करने के लिए जिले को अवार्ड के लिए चयनित किया गया है। 11 जनवरी को दिल्ली में मुख्य विकास अधिकारी को पुरस्कृत किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया के निर्देशन में पांचाल जल संचयन प्रोजेक्ट 22 मार्च 2019 को शुरू किया गया। इसमें जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के लिए सभी ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, सरकारी भवनों, खेतों आदि पर काम चल रहा है।
वर्षों से उपेक्षित कायमगंज तहसील क्षेत्र में बूढ़ी गंगा नदी का जनपद में लगभग 36.7 किलोमीटर लंबाई में जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। जबकि सभी 1608 परिषदीय स्कूल परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए।
योजना के तहत स्कूल, सभी सरकारी कार्यालय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, ब्लॉक में पार्क, प्रत्येक गांव व गोशाला में तालाब, हैंडपंपों पर सोकपिट, ब्लॉक में पांच फार्म पौंड व चेकडैम आदि कार्य कराए जा रहे हैं। इसके चलते वर्षों बाद इस बार बरसात के बाद सभी ब्लाक क्षेत्रों में भूगर्भ जलस्तर बढ़ा है।
खास बात है कि यह प्रोजेक्ट सीधे विद्यालयों से जुड़ा होने से एक तरह से बाल अभियान है। इससे बच्चों के माध्यम से लोगों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। स्कूलों में प्रार्थना के साथ जल संरक्षण की शपथ भी होती है। ग्राम पंचायतों की वाटर मैनेजमेंट कमेटी भी इस पर काम कर रही है।
इससे प्रति वर्ष 7 बिलियन लीटर जल का संचयन होगा। यह कार्य मनरेगा कन्वर्जेंस, ग्राम पंचायत, माइनर इरीगेशन डिपार्टमेंट सहित अन्य विभागों के सहयोग से लोगों को प्रेरित कर किया जा रहा है। उद्देश्य है कि जिले के सेमी क्रिटिकल जोन में चल रहे पांच ब्लाकों को सामान्य जोन में लाया जाए।
सीडीओ ने बताया कि इस वर्ष जिले के सभी स्कूलों सहित 5246 सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए गए, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इससे जिले को अवार्ड के लिए चयनित किया गया है। 11 जनवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसका नारा है -जल बचाएं, अपना कल बचाएं। 22 मार्च तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।