कमालगंज (फर्रुखाबाद)। हादसे की शिकार हुई बस में उगरापुर गांव के छम्मीलाल राजपूत भी अपने पुत्र सौरभ के साथ रजीपुर से जयपुर जाने के लिए सवार हुए थे। आग लगी तो नीचे सीट पर बैठे छम्मीलाल ने अपनी व बेटे की जान बचाने के लिए खिड़की के शीशे को तोड़ने के लिए पहले हाथ और फिर पैर से प्रहार किया। बात नहीं बनी तो अपना सिर शीशे में मारने लगे। शीशा टूटा तो पहले उन्होंने पुत्र सौरभ को खिड़की से बाहर खड़े लोगों को पकड़ा दिया। फिर वह उतरे शीशा तोड़ने में हाथ और पैर के साथ ही सिर पर भी कई जगह काफी चोट लग गई। वह छिबरामऊ के अस्पताल में भर्ती हैं जबकि सौरभ गांव आ गया है।
छम्मीलाल जयपुर के सांगानेर में कपड़े के कारखाने में सिलाई का काम करते हैं। वह अपनी पत्नी शिवदेवी व सौरभ के साथ वहां रहते हैं। सौरभ वहां के आदर्श पब्लिक स्कूल में कक्षा एक का छात्र है। छम्मीलाल के भाई समरपाल के पुत्र गौरव की 3 दिसंबर को मौत हो गई थी। इसी पर पूरा परिवार गांव आया था। पत्नी को गांव छोड़ कर छम्मीलाल अपने पुत्र के साथ जा रहे थे।
शीशा तोड़कर कूदने में लगी चोट
कमालगंज। थाना क्षेत्र के गांव शेरपुर सराय के राजीव पुत्र नंदराम जाटव भी इसी बस से जयपुर जा रहे थे। वह जयपुर के सांगानेर में सड़क किनारे पटरी पर सब्जी की दुकान लगाते हैं। वह घर से 40 हजार रुपये लेकर जा रहे थे। उन्होंने हाथ से खिड़की का शीशा तोड़ा और बस से कूदकर जान बचाई। उनके हाथ-पैर में कांच घुसने से चोट लगी। अंदरूनी चोट है। वह भी छिबरामऊ अस्पताल में भर्ती हैं। घायल राजीव ने बताया कि वह स्लीपर पर ऊपर बैठे थे। ड्राइवर की तरफ से आग फैली। आग इतने तेजी से फैल रही थी कि गेट की तरफ कोई नहीं जा पा रहा था। जिसने खिड़की का शीशा तोड़ पाया वह जान बचा पाया।
बेटे के नाम लाइट-साउंड सर्विस की थी दुकान
कमालगंज। छिबरामऊ बस हादसे में लापता मोहम्मद लईक सात वर्ष पूर्व जयपुर के सांगानेर गए थे। वहां वह गैरेज में वाहनों में डेंटिंग पेंटिंग का काम करते थे। जुलाई 19 में वह अपने बच्चों व पत्नी को भी जयपुर ले गए। वहां उन्होंने सांगानेर के स्कूल में शादिया का कक्षा 3, शान का कक्षा 2 व शैफ का कक्षा एक में दाखिला कराया था। इसके बाद उनका मन जयपुर में ही बसने का हो गया। इसीलिए 26 नवंबर 2019 को उन्होंने गांव में सड़क पर अपने बेटे के नाम से शान लाइट हाउस एंड साउंड सर्विस की दुकान खोली। गांव के ही एक युवक को दुकान की जिम्मेदारी दे दी।
18 दिन पूर्व पथरी का इलाज कराने को आए थे
मोहम्मद लईक 25 दिसंबर को जयपुर से उगरापुर स्थित अपने गांव आए थे। उनके भतीजे अदनान ने बताया कि चाचा को पथरी की समस्या हो गई थी। रजीपुर कस्बे में डॉ. बंगाली से पथरी का इलाज कराने आए थे। दवा लेने के बाद उनकी तबियत सही हो गई थी। वह पत्नी व बच्चों के साथ कुछ दिन और परिवार वालों के साथ बिताना चाहते थे। लेकिन वह जिस गैराज में काम करते थे, वहां से रोज शाम को आने के लिए फोन आ रहे थे। इसलिए वह शुक्रवार को जयपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। उन्होंने दोपहर तक परिजनों के साथ खेत में आलू की बेल भी एकत्रित कराई।
शान ने लगाई आवाज, चाचा मुझे बचा लो
गांव वालों ने बताया कि जब जलती बस से छम्मीलाल खिड़की से निकल रहे थे तो ऊपर स्लीपर में बैठे लईक के पुत्र शान ने दर्द भरी आवाज में कहा कि चाचा मुझे बचा लो। इस पर छम्मीलाल ने उसका हाथ पकड़ा तो अधिक जले होने से उसकी खाल हाथ में आ गई। ग्रामीणों को अस्पताल में भर्ती छम्मीलाल ने जब इस कारुणिक दृश्य की जानकारी दी तो गांव वालों की आंख नम हो गईं।