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रोडवेज बसों का टोटा, प्राइवेट की बल्ले-बल्ले

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फर्रुखाबाद में स्थानीय रोडवेज डिपो में बसों की संख्या कम होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है और इसका लाभ निजी बस संचालक उठा रहे हैं। वे पुलिस व डिपो के अधिकारियों की मिलीभगत से स्टैंड के गेट के पास ही बसें लगाकर सवारियां भरते हैं। सरकारी बसें न मिलने से यात्रियों की भी मजबूरी होती है कि इन बसों से सफर करें। इन बसों में सवारियां ठूसकर भरी जातीं हैं। किराया भले ही अपेक्षाकृत कम होता है लेकिन सीट से ज्यादा सवारी होने से लोगों को भी दिक्कत होती है।
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स्थानीय रोडवेज डिपो के पास 102 बसें हैं। लॉकडाउन में यात्री कम निकलने पर डिपो ने एक माह पूर्व 44 बसें सरेंडर कर दी थीं। पर अब अनलॉक-3 में यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। इसके बाद भी स्थानीय डिपो दिल्ली जैस महत्वपूर्ण मार्ग पर भी बसें नहीं बढ़ा रहा है। इस मार्ग पर 35 बसें ही जा रही हैं जबकि पूर्व में 55 बसें जा रही थीं।
अन्य मार्गों पर भी बसों की संख्या में कटौती की गई है। इसके चलते ही रोज यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है। शुक्रवार को पूरी रात रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों की रही। शाहजहांपुर, हरदोई के सैकड़ों श्रमिक वर्ग के लोग दिल्ली जाने के लिए परिवार, बच्चों सहित जमीन पर बैठे रहे।
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बावजूद सिके रोडवेज की बस नहीं उपलब्ध कराई जा सकी। इस दौरान बस अड्डे के गेट पर लगीं निजी बसें यात्रियों को बैठाती रहीं। बसों का टोटा होने से इनमें लोगों को छत तक पर बैठाया गया। ये स्थिति तब थी जब कादरीगेट चौकी पुलिस समेत यातायात के पुलिस कर्मी भी मौजूद थे।
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