बौद्ध स्तूप पर पूजन करते अनुयायी।
- फोटो : अमर उजाला
बुद्ध महोत्सव में रविवार को दक्षिण कोरिया के भंते मुनीम ने भगवान बुद्ध के स्वर्गलोक जाकर धम्म दीक्षा देने का प्रकरण सुनाया और धम्मपाठ व पंचशील के सिद्धांतों पर चर्चा की। संकिसा के महत्व को बताया। इसके अलावा बुद्धम् शरणम् गच्छामि...जयघोष के साथ धम्म यात्रा निकाली गई। भंते मुनीम ने कहा कि भगवान बुद्ध ने स्वर्ग जाकर धम्म दीक्षा दी थी। वे स्वर्ग से नीचे संकिसा में इसी स्तूप पर उतरे थे।
भगवान बुद्ध के दाएं ओर इंद्र और बाएं ओर ब्रह्मा जी थे, इसलिए संकिसा वह स्थान है जहां धरती और आसमान का मिलन होता है। ऐसा पृथ्वी पर दूसरा स्थान नहीं है। संकिसा में स्वर्ग का आनंद मिलता है। भंते धम्म पाल ने कहा कि संकिसा विश्व का आठवां वह स्थान है जिसका विशेष महत्व है। प्रभुदयाल ने बताया कि बुद्ध महोत्सव में 600 लोगों ने बौद्ध धर्म को अपनाया।
इस दौरान कर्मवीर शाक्य, भंते प्रज्ञाशील, भंते गुणसागर, भंते गुणानंद, भंते चेतसिक बौद्ध, टी प्रसाद, डा. नवल किशोर, सुदेश शाक्य, इटावा सदर विधायक रघुराज शाक्य आदि मौजूद रहे। इधर, संकिसा में स्तूप पर भगवान हनुमान और बिसहरी देवी का मंदिर बना है। रविवार को सनातन धर्मी बिसहरी देवी की पूजा अर्चना करने पहुंचे। इन्होंने बिसहरी देवी के जयकारे लगाए। स्तूप के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए। पुलिस कर्मियों ने पांच-पांच व्यक्तियों को मंदिर में पूजा करने जाने की अनुमति दी।