हादसे में बाइकसवार चचेरे भाइयों की मौत
अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। मामा के यहां से कनागत (श्राद्ध) की दावत खाकर लौटते चचेरे भाई सोमवार को देर रात हादसे के शिकार हो गए। सैफई ले जाते समय उनकी मौत हो गई जबकि साथ मौजूद भाभी समेत चार लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। युवकों के शव पोस्टमार्टम को भेजे गए हैं।
शहर कोतवाली के गांव नगला कलार निवासी रक्षपाल राजपूत का दिव्यांग पुत्र ब्रजेश (33) सोमवार को अपनी भाभी आरती (37), चचेरे भाई रनवीर (37) पुत्र जगदीश के साथ जलालाबाद में मामा के घर कनागत की दावत खाने गए थे। देर रात तीनों बाइक से लौट रहे थे। वे हरसिंहपुर गहलवार तिराहे पर पहुंचे, तो आगे जा रहे बाइक चालक बिना हाथ या इंडिकेटर दिए मुड़ गया। इससे पीछे से आ रहे ब्रजेश की बाइक उसमें टकरा गई।
दोनों बाइकों पर सवार लोग सड़क पर जा गिरे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ब्रजेश, रनवीर, आरती और दूसरी बाइक पर सवार चार लोगों में से गढ़ैया निवासी शिवकुमार, उमाशंकर, सुरेंद्र को राजेपुर सीएचसी में भर्ती कराया। यहां से ब्रजेश, रनवीर को लोहिया अस्पताल लाया गया, यहां इमरजेंसी सील होने से परिजन उन्हें लिंजीगंज अस्पताल ले गए। वहां से रेफर किए जाने पर परिजन निजी एंबुलेंस से उन्हें सैफई ले जा रहे थे। लेकिन दोनों ने रास्ते में दम तोड़ दिया। इस पर परिजन शवों को घर ले गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया है। ब्रजेश हेलमेट लगाए था। चार भाइयों में छोटा था। उसकी शादी नहीं हुई थी। गांव में ही परचून की दुकान रखे था। मां गंगा देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। रनवीर के दो पुत्र नमन, दिव्यांशु, दो पुत्रियां चांदनी और मीनाक्षी हैं। बघार नाले पर चाट-पकौड़ी की दुकान चलाता था। मां श्यामा देवी और पत्नी संगीता शव देखकर बार-बार बेहोश होती रहीं। ब्रजेश के भाई इतवारी के पुत्र अरुण ने थाने में तहरीर दे दी है।
एंबुलेंस न मिलने से इलाज में हुई देरी
ब्रजेश और रनवीर को लिंजीगंज अस्पताल ले जाया गया। वहां परिजन भी पहुंच गए। रनवीर के भाई अमित कुमार ने बताया कि लिंजीगंज अस्पताल से करीब एक घंटे तक सरकारी एंबुलेंस को कॉल करते रहे। बाद में मजबूर होकर निजी एंबुलेंस से सैफई ले जा रहे थे। यदि सही समय पर इलाज मिल जाता, तो भाइयों की जान बच सकती थी।