फर्रुखाबाद। जिला जेल फतेहगढ़ के तत्कालीन अधीक्षक भीमसेन मुकुंद अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में विवादों से घिरे रहे। वसूली के दबाव से जहां कर्मचारी त्रस्त थे, वहीं जेलर से विवाद में दंडित भी हो चुके हैं। उन्हें परिनिंदा प्रविष्टि भी मिल चुकी है। अब कन्नौज में दो बंदियों के जेल से भागने के मामले में उन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
जनपद कन्नौज की जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद की चर्चा यहां की जिला जेल में होती रही। वह जिला जेल फतेहगढ़ में भी तीन वर्ष दो माह तैनात रह चुके हैं। 17 नवंबर 2021 से 25 जनवरी 2025 तक फतेहगढ़ में कार्यकाल रहा। इस बीच बंदियों से वसूली के नए-नए नियम बनाए गए। इसके लिए जेल कर्मियों पर दबाव बनाया गया तो जेल प्रशासन में ही विद्रोह की स्थिति आ गई थी। वर्ष 2022-23 में अवकाश न देने पर बंदी रक्षकों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसको लेकर विवाद भी हुआ।
मई 2024 में बीमार जेल वार्डर जगदीश प्रसाद को इलाज कराने के लिए भी अधीक्षक ने अवकाश नहीं दिया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें आवास विकास स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान जेल वार्डर की मौत हो गई थी। इसको लेकर भी कर्मचारियों में आक्रोश पनप गया था। उनकी घेराबंदी भी कर ली गई। बंदियों से वसूली को लेकर दबाव बनाने पर अधीक्षक की एक जेलर से भी ठन गई थी।
इससे अधीक्षक ने जेलर के खिलाफ बंदी से मशक्कत कटाने के नाम पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाकर शिकायत कर दी थी। इस मामले में डीआईजी जेल ने जब जेलर से जवाब मांगा तो जेलर ने पूरे खेल की पोल ही खोल दी। इससे जेलर के खिलाफ षड्यंत्र के तहत झूठी शिकायत करने में भीमसेन मुकुंद को परिनिंदा प्रविष्टि देकर दंडित किया गया। जेल सूत्रों की मानें तो फिरोजाबाद जेल में तैनाती के दौरान बंदी रक्षक ने सुसाइड कर लिया था। इसमें छुट्टी न देने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया। इस मामले की जांच अभी चल रही है। इसके अलावा भर्ती घोटाला में भी वह चर्चा में आ चुके हैं। फतेहगढ़ जिला जेल में तैनाती के दौरान भीमसेन मुकुंद से अधिकांश बंदी रक्षक त्रस्त थे।
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जिला जेल में बढ़ी सतर्कता व बंदियों की निगरानी
फर्रुखाबाद। कन्नौज जेल से दो बंदियों के भागने की घटना के चलते जिला जेल फतेहगढ़ में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। बंदी रक्षकों को ड्यूटी पर और मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए।
जिला जेल फतेहगढ़ में 8 नवंबर 2021 को बंदी की मौत के बाद पनपा आक्रोश बेकाबू हो गया था। आक्रोशित बंदियों ने जमकर पथराव व तोड़फोड़ हुई थी। यह मामला फायरिंग तक पहुंच गया था। इसमें एक बंदी की गोली लगने से मौत हो गई थी। कन्नौज जेल से दो बंदियों की फरारी के बाद जिला जेल में फिर एक बार और सतर्कता बढ़ा दी गई।
कन्नौज जेल की घटना पर उठ रहे सवाल
हालांकि कन्नौज जेल से दो बंदियों की एक साथ फरारी के मामले में भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि रात में फरारी की बात कहीं जा रही है। जबकि शाम को 6 से सात बजे तक बैरकों में बंदियों की गिनती करने के बाद ताला लगाया जाता है। सुबह 5.30 बजे फिर बंदियों की गिनती होती है। बैरकों में बंदियों की गिनती और जेल परिसर में गश्त के बावजूद कंबलों की रस्सी बनाकर बंदियों द्वारा जेल की दीवार कूदना मनगढ़ंत कहानी लग रही है। यह भी चर्चा रही कि बंदियों के भोजन के बर्तन उठाने के दौरान कर्मचारियों के साथ बंदी भी गेट से ही निकल गए। इसमें जेल कर्मियों की भी शह बताई जा रही है।