फर्रुखाबाद। राज्य सड़क परिवहन निगम के नियमों को ताक पर रखकर लखनऊ से बस लौटने के पहले ही टाइम कीपर ने ड्यूटी स्लिप जारी कर दी। मनमानी इतनी कि दूसरे परिचालक को हजारों रुपये का टिकट भरा बैग भी जारी कर दिया गया। जबकि बस लखनऊ से वापस कार्यशाला पहुंची ही नहीं थी। अब जिस परिचालक के नाम दूसरा बैग और ड्यूटी स्लिप जारी हुई, वह विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर शिकायती पत्र डाल रहा है।
रोडवेज बसों में ड्यूटी पर जाने वाले परिचालक के नाम एक बैग जारी होता है, इसमें यात्री टिकट, वे-बिल, ईटीएम भी रहता है। ड्यूटी स्लिप भी जारी होती है। मगर यह सब तभी संभव है, जब रूट पर गई बस की कार्यशाला में जांच कर ली जाए। परिचालक को दिया गया बैग और ईटीएम भी जमा हो जाए।
कई दिनों से लखनऊ जाने वाली बस पर चलने को लेकर करीब सात साल से नियमित परिचालक जरनैल सिंह और संविदा परिचालक पंकज मिश्रा में खींचतान चल रही है। बुधवार सुबह परिचालक जरनैल सिंह बस को लेकर लखनऊ चले गए। वह लौट भी न पाए थे कि संबंधित पटल से सेटिंग कर संविदा परिचालक पंकज मिश्रा ने अपने नाम उसी बस का दोपहर तीन बजे के करीब दूसरा बैग जारी करवा लिया। टाइमकीपर से अपने नाम की ड्यूटी स्लिप भी कटवा ली। इसकी भनक लगने पर रात 10 बजे परिचालक जरनैल सिंह ने वापस आने पर विरोध दर्ज कराया। बृहस्पतिवार सुबह टाइमकीपर ने जरनैल सिंह को बस पर जाने के निर्देश दे दिए।
इससे संविदा परिचालक पंकज मिश्रा खफा हो गए। उन्होंने विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर एआरएम के नाम एक पत्र लिखा। कहा कि 15 अक्तूबर को लखनऊ रूट पर बस संख्या 7055 पर उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। मगर कुछ अन्य लोगों ने कूटरचित तरीके से भेदभाव करके दूसरे परिचालक को भेज दिया। कहा कि उनके नाम जारी ड्यूटी स्लिप, टिकट एवं मार्गपत्र (वे-बिल) उनके पास है। शुक्रवार को भी लखनऊ जाने वाली बस पर परिचालक जरनैल सिंह भेजे गए।
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कार्यशाला में बस आने से पहले बैग व ड्यूटी स्लिप देना गलत : एआरएम
एआरएम राजेश कुमार ने बताया कि रूट पर भेजी गई बस का बैग जब तक जमा नहीं हो जाता, तब तक दूसरा बैग किसी परिचालक को नहीं दिया जा सकता। ड्यूटी स्लिप भी काटना गलत है। संविदा परिचालक के नाम ड्यूटी स्लिप व बैग जारी करने का मामला संज्ञान में है। फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। व्हाट्सएप ग्रुप पर एक पत्र डाला गया है। फिर भी वह इस मामले की गंभीरता से जांच कराएंगे।