संवाद न्यूज एजेंसी
कमालगंज। विकास खंड की 118 ग्राम पंचायतों में तीन चरणों में कराया गया मनरेगा सोशल ऑडिट का कार्य पूरा हो गया है। अंतिम चरण के सोशल ऑडिट में बुधवार को कई ग्राम पंचायतों में टीम को मनरेगा के अभिलेख नहीं दिखाए गए। इसके चलते संबंधित टीमों को अभिलेख देखे बिना ही वापस होना पड़ा। अधिकांश ग्राम पंचायतों में पंजीकृत जॉबकार्डधारकों की तुलना में 25 प्रतिशत ही क्रियाशील मिले।
कोरोना का प्रकोप शुरू होने के बाद मनरेगा कार्य कराए जाने के दौरान ही मौके पर ही समवर्ती सोशल ऑडिट की व्यवस्था शुरू की गई। इससे पूर्व वित्तीय वर्ष में एक बार ही ऑडिट होता था। समवर्ती ऑडिट में पिछले दो माह में प्रत्येक ग्राम पंचायत में तीन बार दो सदस्यीय टीम ने गांव पहुंच कर सोशल ऑडिट किया। अंतिम चरण में बुधवार को 18 टीमों ने आवंटित ग्राम पंचायत में जाकर जांच की। सदरियापुर में ऑडीटर अरविंद कुमार शर्मा व श्यामबहादुर को मनरेगा के सात रजिस्टरों में एक भी नहीं दिखाया गया। सिंधौली, सितौली, सियांपुर में भी रजिस्टर नहीं दिखाए गए।
शरफुद्दीनपुर में टीम के सदस्यों ने जब रोजगार सेवक को अभिलेख लेकर आने के लिए फोन पर कहा तो उसने आलू की फसल में पानी लगाने की बात कह पल्ला झाड़ लिया। इसके चलते कई बिंदुओं की जांच नहीं हो पाई। बर्नाबुजुर्ग में 540 पंजीकृत जॉबकार्डधारकों में 110 ही क्रियाशील पाए गए।