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सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई 20 बसों की पत्रावली गायब होने की जांच ठंडे बस्ते में

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फर्रुखाबाद। सामान्य से स्लीपर में तब्दील 20 बसों की पत्रावली एआरटीओ कार्यायल के रिकार्ड रूम से गायब हो गई थी। एआरटीओ ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पांच माह बीतने के बाद मुकदमे की जांच ठंडे बस्ते में है। विवेचक ने सिर्फ चार लोगों के बयान दर्ज किए हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट अब तक विवेचक को मांगने पर भी नहीं दी गई है।
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कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र के गांव घिलोई के पास जनवरी में स्लीपर बस ट्रक से टकरा गई थी। आग से कुछ लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद कार्यालय से छिबरामऊ में दुर्घटनाग्रस्त बस सहित बीस स्लीपर बसों की पत्रावली एआरटीओ कार्यालय से गायब हो गई। इस मामले में तत्कालीन एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय 18 जनवरी को फतेहगढ़ कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच महिला उपनिरीक्षक सीमा पटेल कर रही हैं। उन्होंने कार्यालय के लिपिक राजेंद्र, भीम बाबू, आरआई जीवन कुमार समेत चार लोगों बयान लिए थे। रिकार्ड रूम की चाबी किसके पास रहती है। कन्नौज में हुई दुर्घटना के बाद रिकार्ड रूम से फाइलें निकालने कौन जाता था। फाइलों के ढेर में आखिर किसको पता था कि सामान्य से स्लीपर बसों की फाइलें कहां पर रखी हैं। इन सवालों के जवाब भी किसी ने विवेचक को नहीं दिए हैं।
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विवेचक सीमा पटेल ने बताया कि विभागीय जांच की रिपोर्ट मुख्यालय से मांगी है, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं मिली है। लॉकडाउन के कारण भी विवेचना में देरी हुई है। अभी अवकाश पर जा रही हूं। वापस आने के बाद मुकदमे की विवेचना तेज करूंगी।
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