फर्रुखाबाद। गैंगस्टर एक्ट में कुर्क की गई जमीन से रंगदारी वसूली, धमकी और आपराधिक साजिश के मामले में अदालत ने आरोपी अनुपम दुबे और अवधेश उर्फ भूरे को राहत देने से इन्कार कर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-09 मनोज कुमार तिवारी ने दोनों आरोपियों की मुकदमे से नाम हटाने की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि पत्रावली पर प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
कोतवाली फर्रुखाबाद में दर्ज मुकदमे में वादी कृष्ण गोपाल तिवारी ने आरोप लगाया था कि गैंगस्टर एक्ट में कुर्क की गई भूमि की सुपुर्दगी उन्हें दी गई थी, लेकिन अवधेश उर्फ भूरे ने अनुपम दुबे और अनुराग दुबे के नाम पर प्रतिवर्ष 2.50 लाख रुपये की मांग की और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। कुर्क भूमि पर अवैध रूप से खेती कर फसल का लाभ भी उठाया गया। बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि अनुपम दुबे घटना अवधि में जेल में निरुद्ध था और उसे झूठा फंसाया गया है। वहीं अभियोजन पक्ष ने वादी, स्वतंत्र गवाहों और तहसील कर्मियों के बयान का हवाला देते हुए आरोपों को सही बताया। अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर केवल अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों को देखा जाता है। न्यायालय ने अनुपम दुबे को मथुरा जेल से अगली तारीख पर पेश करने और अन्य आरोपियों को आरोप निर्धारण के लिए तलब करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आदेश में कहा कि अनुराग दुबे आरोप निर्धारण के लिए नियत तारीख को कोर्ट में उपस्थित नहीं होते हैं तो इसे न्यायिक कार्रवाई में असहयोग मानते हुए जमानत की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।