फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Farrukhabad News: 84 किमी में बनेगा तटबंध, 200 गांवों को बाढ़ से मिलेगी निजात

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए गंगा किनारे करीब 84 किमी तटबंध बनाया जाएगा। करीब 900 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। तटबंध का निर्माण होने से 200 गांवों को बाढ़ से निजात मिलेगी। किसानों की करीब 260 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
विज्ञापन


गंगा की बाढ़ से हर वर्ष एक लाख से अधिक आबादी प्रभावित होती है। हजारों बीघा फसलें भी बाढ़ की भेंट चढ़ जाती हैं। सड़कें कटने से महीनों बाढ़ पीड़ितों का आवागमन बाधित रहता है। फसलों में लाखों का नुकसान होने से किसान बर्बाद हो जाते हैं। तीन सितंबर को बाढ़ पीड़ितों का दर्द सुनने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद मंच से गंगा की ड्रेजिंग कराने और तटबंध बनाने का वादा किया है।
पूर्व में यह तटबंध करीब 49 किमी का स्वीकृत था। अब इसे पांचाल घाट से लेकर ढाईघाट की तरफ बदायूं सीमा तक और कायमगंज में कासगंज सीमा तक बढ़ाकर करीब 84 किमी का बनाया जाएगा। तटबंध का निर्माण होने से तहसील सदर, अमृतपुर व कायमगंज क्षेत्र के करीब 200 गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन


पांचाल घाट से होगा तटबंध का निर्माण
तटबंध का निर्माण पांचाल घाट से कराया जाएगा। पहले तटबंध की कुल लंबाई 49 किमी प्रस्तावित थी। भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सहमति लेने का काम सिंचाई विभाग कर रहा है। इस तटबंध से पूरी तरह राहत न मिलते देख इसकी लंबाई और बढ़ाई जाएगी। नए प्रस्ताव के तहत ढाईघाट पर बदायूं सीमा तक 10 किमी और बढ़ाया जाएगा। इससे यह तटबंध अब शमसाबाद क्षेत्र के सीमावर्ती गांव भगवानपुर नगला बसोला तक बनाया जाएगा। वहीं, कायमगंज क्षेत्र में जनपद कासगंज की सीमा तक करीब 25 किमी लंबाई बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार होगा। यहां सीमावर्ती गांव राजपुर तुर्रा तक तटबंध बनाने की योजना है।

डेढ़ माह में तैयार होगा प्रस्ताव
अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग दुर्ण कुमार ने बताया कि पूर्व में प्रस्तावित तटबंध की लंबाई बढ़ाने से अब नए सिरे से प्रस्ताव बनाने में करीब डेढ़ माह का समय लगेगा। पूर्व में बनाई गई परियोजना पर 133 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सहमति ली जा रही है। तटबंध की लंबाई बढ़ने से करीब दो गुनी भूमि अधिग्रहीत करनी होगी। इससे अब करीब 260 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की जरूरत होगी। यह तटबंध तीनों तहसीलों के 45 गांवों से होकर निकलेगा।

ड्रेजिंग के लिए भेजा जा चुका प्रस्ताव
अधिशासी अभियंता ने बताया कि गंगा की ड्रेजिंग के लिए पहले ही प्रस्ताव भेजा चुका है। ड्रेजिंग का काम नलकूप विभाग से होगा। वहां से अभी ड्रेजिंग पर खर्च होने वाली धनराशि का एस्टीमेट नहीं आया है। अब ड्रेजिंग का क्षेत्र बढ़ जाएगा।

किसानों से भूमि अधिग्रहण की सहमति देने की अपील
अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग दुर्ण कुमार ने बताया कि किसान जितनी जल्दी भूमि अधिग्रहण की सहमति देंगे, उतनी जल्दी तटबंध निर्माण शुरू होगा। उन्होंने बाढ़ की विभीषिका से बचने के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण की जल्द ही सहमति देने की अपील की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें