संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। सीएमओ के अधीन शहर का सिविल अस्पताल लिंजीगंज में आयुष चिकित्सक के भरोसे एलोपैथिक सेवाएं चल रही हैं। यहां आंख के मरीज बढ़े हैं, लेकिन न डॉक्टर है और न ही पर्याप्त ड्रॉप। प्रसूताओं को भोजन व नाश्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
सिविल अस्पताल लिंजीगंज आबादी के बीच होने से यहां प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में तैनात चार डॉक्टरों में एक आयुष के हैं। बुधवार सुबह 10.30 बजे आयुष चिकित्सक नवनीत गुप्ता मरीज देख रहे थे। वह एलोपैथिक दवाएं लिख रहे हैं। आयुष फार्मासिस्ट विपिन कुशवाहा अस्पताल में नहीं थे। अधीक्षक डॉ.अंशुल चतुर्वेदी व डॉ. ऋषिनाथ के कक्ष में कुर्सी खाली थी। डॉ.आसमा प्रसूति अवकाश पर बताई गईं। फिलहाल आयुष डॉक्टर के भरोसे ही अस्पताल के मरीज मिले।
दूसरी ओर फार्मासिस्ट परितोष अवस्थी के कक्ष में संविदा पर तैनात डॉ.ऋषिनाथ गुप्ता बैठे मिले। उन्होंने बताया कि अधीक्षक विभागीय कार्य से काउंसिलिंग में बाहर गए हैं। उनकी शिविरों सहित कई जगह ड्यूटी है। अस्पताल में आंख के इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है जबकि अस्पताल में नेत्र सर्जन की तैनाती ही नहीं है। इससे वह व आयुष चिकित्सक को ही आंख के मरीजों को भी देखना पड़ता है। वहीं महिला वार्ड में तीन प्रसूताएं भर्ती मिलीं। पूछने पर महिलाओं ने बताया कि वह मंगलवार को भर्ती हुई थीं। अस्पताल से उन्हें न तो भोजन मिला और न ही नाश्ता। बिजली जाने पर पंखे भी बंद हो जाते हैं। इससे गर्मी में परेशानी होती है।
आई ड्राॅप न देने पर नोकझोंक
अस्पताल में प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश मरीज खुजली व आंख के इंफेक्शन से पीड़ित होते हैं। कई मरीजों को दवा काउंटर से बिना आई ड्राॅप दिए वापस कर दिया जाता है। बुधवार को दवा काउंटर पर मरीजों को आई ड्राप देने से मना करने पर कई बार नोकझोंक होते दिखी। हालांकि फ्लैश चमकते ही सभी मरीजो को आई ड्राप दे दिया गया। फार्मासिस्ट अपर्णा यादव ने बताया कि आई ड्राॅप की मांग बढ़ गई है। जिन्हें एक-दो पहले ड्राॅप दिया जा चुका है, उन्हें मना कर दिया जाता है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो खुजली व दर्द का ट्यूब भी कम मरीजों को ही दिया जाता है।
फोटो खींचकर मिलता है एक्सरे
अस्पताल में जांच के इंतजाम बदहाल हैं। यहां पांच वर्ष खराब सीबीसी मशीन ठीक न कराये जाने से सीबीसी जांच के लिए मरीजों को लोहिया अस्पताल रेफर किया जाता है। एक्सरे मशीन है, लेकिन प्रिंटर न होने से एक्सरे फिल्म नहीं निकल पाती। एक्सरे कराने वाले मरीज फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाते हैं। इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।
जर्जर भवन में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
परिसर में बना आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। यहां चिकित्सक नीना रानी बैैठी मरीज देख रही थीं। अस्पताल में फार्मासिस्ट तैनात न होने से वार्ड ब्वाय जितेंद्र कुमार मरीजों को दवा दे रहे थे। परिसर में बनी पानी की टंकी में नीचे जीने में दरवाजा न लगा होने से असुरक्षित है।
सुधारी जाएंगी व्यवस्थाएं
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि गुरुवार को अधीक्षक की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही अन्य व्यवस्थाएं भी सुधारी जाएंगी। डॉक्टरों की कमी से दिक्कतें आ रहीं है।