फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में बने पीकू वार्ड में शनिवार सुबह डॉक्टर के न होने से तीमारदार मरीज को लेकर भटकते रहे। कंपिल से आया दंपती मासूम बेटी के इलाज के लिए परेशान रहे।
तीमारदारों के दबाव में कर्मियों ने डॉक्टरों को फोन किया, फिर भी मायूसी हाथ लगी। करीब साढ़े तीन घंटे के बाद 11 बजे डॉक्टर के आने पर बच्चों को इलाज दिया गया।
एक माह से 14 साल तक के बच्चों के इलाज के लिए पीकू वार्ड में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसमें सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक डॉ. विवेक सक्सेना, दो बजे से रात आठ बजे तक डॉ. अजय सूद और रात आठ से सुबह आठ बजे तक इमरजेंसी पड़ने पर महिला अस्पताल के सीएमएस बालरोग विशेषज्ञ डॉ. कैलाश दुल्हानी बच्चों को देखते हैं।
शनिवार सुबह आठ बजे डॉ. विवेक सक्सेना अस्पताल नहीं पहुंचे। पांचालघाट निवासी मोहम्मद इंताज चार साल की बेटी अलीशा को लेकर सुबह पौने 11 बजे पहुंचे। वहां डॉक्टर नहीं मिले।
इसी तरह 45 किलोमीटर दूर कंपिल के गांव बिलहा निवासी रिषिपाल सिंह, पत्नी सोनम के साथ चार साल की बेटी शगुन को लेकर सुबह 10 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे।
वहां से उन्हें पीकू वार्ड में भेज दिया गया। वहां कई बार कहने पर भी किसी ने नहीं सुना। रिषिपाल ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ गई, तो तीमारदारों के कहने पर कर्मचारियों ने डॉक्टर को कई बार फोन किया, मगर उन्होंने हर बार कुछ देर में आने की बात कही।
इससे मरीज परेशान रहे। साढ़े 11 बजे डॉ.विवेक सक्सेना पीकू वार्ड पहुंचे, तब दूरदराज से आए मरीजों को इलाज मिल सका।