विजया बैंक की रेलवे रोड शााखा के गेट पर ग्राहकों को हटाता पुलिसकर्मी।
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नोटबंदी से जनता का हाल बेहाल है। कोई चार दिन तो कोई आठ दिन से रुपये निकालने के लिए भटक रहा है। दिन भर खड़े रहने के बाद भी सैकड़ों ग्राहक रोजाना मायूस होकर घर लौट रहे हैं। ग्राहकों से अमर उजाला संवाददाता ने जब बातचीत की तो उन्होंने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया।
विजया बैंक से रुपये निकालने आए वसीम खां निवासी अमेठी जदीद का कहना है कि सोमवार से बैंक रोजाना आ रहे हैं। घंटों लाइन में लगते हैं लेकिन जब तक उनका नंबर आता है, तब तक या तो रुपये खत्म हो जाते हैं या फिर बैंककर्मी कह देते हैं कि अब कैश जमा और निकालने का समय समाप्त हो गया।
गुरुवार को भी सुबह 9.30 बजे ही आकर लाइन में लग गए। देखते हैं आज रुपया निकलता है या नहीं। रुपये न निकलने से गृहस्थी चलाने में संकट खड़ा होने लगा है। मोहल्ला गढ़ी अब्दुल मजीद खां के शब्बन कहते हैं कि तीन दिन से बैंक आ रहे हैं लेकिन अभी तक कैश नहीं मिला है। बजरिया शमसेर खानी की रहने वाली लवली देवी कहती हैं कि आठ दिन से लाइन में लग रही हैं।
अभी तक उन्हें रुपये नहीं मिले हैं। घर में खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है। जैसे-तैसे गृहस्थी चला रही हैं। उन्होंने कहा कि आज अगर रुपये न मिले तो वह बैंक के बाहर ही बैठ जाएंगी।