फोटो- 47 कमालगंज में राज्य मार्ग से बारिश के दौरान गुजरते वाहन। संवाद
फर्रुखाबाद। भाव में मंदी के बाद शुक्रवार को आलू की फसल पर आफत की बारिश हुई। इससे किसान खासे चिंतित हैं। तैयार आलू की खोदाई प्रभावित होने से खेत में ही खराब होने की आशंका है। वहीं पिछैती झुलसा के प्रकोप को लेकर किसान परेशान हैं।
जनपद में किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। इससे 43 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में आलू की खेती होती है। इस वर्ष भाव की मंदी से आलू किसान वैसे भी टूट चुका है। पहले शीतगृहों में भंडारित आलू में घाटा हुआ, फिर नई आलू की फसल में भी लागत निकलना मुश्किल है। इन दिनों खेतों में आलू तैयार है। इससे किसान आलू खोदकर मंडी पहुंचा रहे है तो कोई पकी फसल तैयार करने के लिए इंतजार में है।
शुक्रवार शाम से अचानक हुई बारिश आलू की फसल के लिए बड़ी आफत से कम नहीं है। इससे किसान खासे चिंतित हैं। इससे जहां खेतों में तैयार खड़ी फसल में पानी भरने से आलू सड़ने की आशंका है। वहीं झुलसा का प्रकोप बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसान चिंतित हैं। हालांकि गेहूं व गन्ना की फसल के लिए यह बारिश फायदेमंद है।
फसल सुरक्षा कृषि वैज्ञानिक डॉ.अभिमन्यु यादव ने बताया कि बारिश आलू की फसल के लिए नुकसानदायक है। इसमें पिछैती फसल में झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि आलू के खेत में पानी न भरने दें। इसके अलावा चना, टमाटर, मटर की फसल व सब्जी की पौध को भी बारिश से नुकसान पहुंचेगा। सरसों, गेहूं व गन्ना की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है।