पुरानी रंजिश के चलते हुई गोलीबारी में घायल जानलेवा हमले का आरोपी डॉ.राममनोहर लोहिया अस्पताल से फरार हो गया। इससे अस्पताल में हड़कंप मच गया। करीब दो घंटे तक जब वह नहीं मिला, तो आनन-फानन में अस्पताल के रिकार्ड में डिस्चार्ज होना दर्शा दिया गया। जबकि घायल अभियुक्त की सुरक्षा में नवाबगंज थाने का सिपाही और चौकीदार तैनात था।
नवाबगंज थाने के गांव गढ़िया बबुरारा में दो अक्तूबर को पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों में फायरिंग हो गई थी। इसमें गांव में प्रमोद यादव पुत्र मुलायम सिंह और दूसरे पक्ष के धर्मवीर सिंह पुत्र कुंवरसेन गोली लगने से घायल हो गए थे।
दोनों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने दोनों ओर से जानलेवा हमले के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने घायल अभियुक्त प्रमोद यादव पर नजर रखने के लिए सिपाही और एक साथी की तैनाती कर दी थी। गुरुवार सुबह प्रमोद की सुरक्षा में थाने से सिपाही ध्रुवकेश और चौकीदार अनंतराम को लगाया गया था।
अभियुक्त प्रमोद ऑर्थो वार्ड में भर्ती था। उसके पास चाचा अनिल लगातार रह रहे थे। बुधवार शाम प्रमोद का मौसेरा भाई वहां पहुंचा। रात में रुकने के बाद सुबह करीब सवा आठ बजे उसने देखा कि बाहर बैठा सिपाही कहीं चला गया है,
तो प्रमोद अपने मौसेरे भाई के साथ चुपचाप खिसक लिया। करीब एक घंटे बाद सिपाही वापस आाया। तब उसने पड़ोसी बेड पर भर्ती मरीज से पूछा, तो अस्पताल में हड़कंप मच गया। सिपाही और चौकीदार प्रमोद को खोजने में जुट गए।
सूचना पर कुछ ही देर में सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा भी पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे बाद सिपाही और चौकीदार अस्पताल वापस पहुंचे। स्टाफ ने डॉक्टरों संग मंत्रणा करके कागजों में उसे डिस्चार्ज दिखा दिया।
दोपहर 12 बजे तक सिपाही और नवाबगंज थाने के दरोगा ने ऑर्थो वार्ड में जाकर पूछताछ की है। नवाबगंज प्रतिनिधि के अनुसार दोपहर के वक्त सिपाही ध्रुवकेश थाने पहुंचा, तो थानाध्यक्ष ने उसे जमकर फटकार लगाई। कहा कि लाइन हाजिर किया जाएगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों को भी सूचना दी गई।
पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि प्रमोद पुलिस हिरासत में नहीं था। वह लोहिया अस्पताल में अपना इलाज करा रहा था। लोहिया अस्पताल में भर्ती दूसरे घायल की सुरक्षा में सिपाही तैनात था। विवेचना में यदि प्रमोद आरोपी पाया जाएगा तो उसकी गिरफ्तारी जरूर की जाएगी।
थानाध्यक्ष वेद प्रकाश पांडेय ने बताया गोली लगने से दोनों पक्ष का एक-एक व्यक्ति घायल हुआ था। दोनों ओर से जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज था। सुरक्षा को पुलिस बल लगाया गया था। अब प्रमोद छुट्टी करवाकर चला गया, तो कोई क्या कर सकता है। वह गिरफ्तार नहीं था।
अस्पताल से फरार अभियुक्त प्रमोद की फरारी के बाद अस्पताल में चर्चा रही कि दोपहर एक बजे के करीब उसे आवास विकास कालोनी के पास एक गली में जमीन पर बैठे हुए साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरक्षा में तैनात चौकीदार अनंतराम ने भी इस बात की पुष्टि की है। लेकिन थानाध्यक्ष वेदप्रकाश पांडेय इससे इनकार कर रहे हैं।
लोहिया अस्पताल जनरल वार्ड एक में बेड नंबर दो पर भर्ती गोली से घायल धर्मवीर ने बताया कि पुलिस ने मिलीभगत करके प्रमोद को भगाया है। जब वह अस्पताल से पुलिस अभिरक्षा में भाग सकता है, तो अब उन्हें भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़ा खेल हुआ है।
पुलिस भी खूब है। जानलेवा हमले के आरोपी की नौ दिन सुरक्षा करती रही। वह स्वस्थ हो गया, तो गिरफ्तारी के बजाय उसे अस्पताल से जाने का मौका भी दे दिया। सवाल उठता है कि जब वह स्वस्थ हो गया था, तो गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई, क्या अब उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, दूसरी तरफ वह फरार सुबह सवा आठ बजे हुआ। 10 बजे के करीब उसे डिस्चार्ज की औपचारिकताएं पूरी की गईं। फिर तैनात सिपाही की थाने में वापसी कितने बजे दर्ज की गई। इन सब मामलों की जांच हो, तो पुलिस के जिम्मेदारों का फंसना तय है।