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प्रशासन पर भारी खनन माफिया

Thu, 01 Sep 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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गंगा जलस्तर
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 बुंदेलखंड के खनन माफियाओं से ज्यादा पुलिस एवं प्रशासन पर यहां के खनन माफिया भारी पड़ रहे हैं। खनन माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने का ही इनके हौसले बुलंद हैं। हाल ही में एसडीएम के साथ अभद्रता करने वाला खनन माफिया अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
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कंपिल थाना क्षेत्र में 10 जून 2013 को सिपाही प्रवेश कुमार यादव और अवधेश कुमार यादव ने अवैध खनन का विरोध किया। अवैध खनन करते गंगा नदी पर दो ट्रैक्टर पकड़ लिए। नतीजतन चौखड़िया गांव के रहने वाले राजकुमार और अजय पाल, पातीराम, रक्षपाल, रामवीर, जवाहर, कल्याण ने सिपाहियों पर हमला बोल दिया और इन दोनों ने सिपाहियों को जमकर मारापीटा।

सिपाहियों की राइफलें छीन लीं। सिपाही प्रवेश कुमार यादव ने इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। नतीजा यह हुआ कि विवेचक हरिओम शर्मा ने 23 जुलाई 2013 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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सत्तापक्ष के दबाव में आकर पुलिस ने अपने ही महकमे के पिटे सिपाहियों की मदद न करके खनन माफियाओं के पक्ष में पूरा रोल अदा किया। नतीजतन रामवीर और जवाहर को पुलिस ने जेल भेजा और अन्य लोग जमानत पर रिहा हो गए।

खनन माफियाओं की इस कारगुजारी के चलते पुलिस शिथिल पड़ गई। नतीजतन कंपिल से लेकर और खुदागंज तक अवैध खनन का कारोबार करोड़ों में बदल गया। सबसे ज्यादा अवैध खनन का कारोबार मौजूदा समय में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र की गंगा में हो रहा है।

यहां बेखौफ खनन माफिया खनन कर रहे हैं। इसका विरोध जब एसडीएम सुरेंद्र सिंह ने किया तो खनन माफियाओं ने उन्हें भी गालीगलौज की। सबसे दुखद बात यह है कि एसडीएम के साथ घटी घटना को तीन दिन बीत जाने के बाद भी एक भी खनन माफिया पकड़ा नहीं गया है।

कागजों में ही सिमट कर एफआईआर रह गई है। इसी तरह से पिछले तीन साल में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर हमले होते रहे और माफिया सत्ता का रौब गालिब कर अपना बचाव करते रहे, जिससे पुलिस में निष्क्रियता आ गई।
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