फर्रुखाबाद। पिछले कई दिनों से बिगड़े मौसम के बाद बुधवार को धूप निकली। कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को मौसम साफ होने का लाभ उठाने की सलाह दी। कहा कि गेहूं की फसल में यूरिया डालें। यदि पिछैती फसल में खरपतवार है तो दवा का छिड़काव करें।
कृषि विज्ञान केंद्र लकूला के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ.अभिमन्यु यादव ने बताया कि अब मौसम साफ रहने की संभावना है। किसान गेहूं की फसल में यूरिया की टॉपड्रेसिंग करें और जायद मक्का व सब्जी आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार करें।
पिछैती गेहूं की फसल में खरपतवार दिखाई दे तो सल्फोसल्फ्यूरान व मेटसल्फ्यूरान की एक यूनिट (16 ग्राम) मात्रा प्रति एकड़ 120 से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों की फसल में माहूं व कीट की रोकथाम के लिए नीम तेल तीन मिली प्रति लीटर या इमिडाक्लोप्रिड एक मिली तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
चना व मटर में फली छेदक कीट प्रबंधन के लिए प्रति हेक्टेयर 5 से 6 फेरोमोन गंधपास लगाएं। रासायनिक नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब (14.5 एससी) एक मिली या एमामेक्टिन बेंजोएट (5 एसजी) 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पिछैती आलू की फसल में झुलसा के लक्षण दिखने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैंकोजेब के साथ साइमोक्सेनिल या फिनामिडोन या डाइमेथोमार्फ का मिश्रण तीन ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें।
आम के बाग में भी करें छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि आम के बागों में कीट एवं मैंगो हॉपर कीट के प्रकोप की संभावना रहती है। इसकी रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड एक मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पेड़ों को साफ करें। सूखी व रोगग्रस्त टहनियां काट लें। उर्वरक, कीटनाशक के लिए उपकरणों को धोकर ही उपयोग करें। छिड़काव करते समय ध्यान रहे कि जिधर से हवा आ रही है, उधर पीठ रखें। छिड़काव दोपहर में करना चाहिए।