सातनपुर उत्पादन मंडी समिति में फर्जी गेटपास के जरिए करोड़ों का शुल्क गबन किया गया। इसकी एक वर्ष से जांच चल रही है। बीच में जांच ठंडी पड़ने के बाद अब फिर तेजी पकड़ गई। जांच अधिकारी ने मंडी सचिव से पांच बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। गबन के मामले में आठ लोगों का फंसना तय माना जा रहा है।
सातनपुर मंडी में वर्ष 2011 से 2016 के बीच बड़े आढ़ती व मंडी सचिव की मिलीभगत से मंडी शुल्क में करोड़ों का गबन किया गया। गेट पास में वजन का जिक्र नहीं किया तो कहीं 9 आर व 6 आर में भी हेराफेरी हुई। तत्कालीन मंडी सचिव अपनी रिश्तेदारी एक बड़े राजनीतिक परिवार से बताकर रौब झाड़ते रहे।
इससे कुछ बड़े आढ़ती मंडी सचिव की सेवा में लगे रहते थे। उन आढ़तियों ने मंडी शुल्क को चूना लगाकर मोटी कमाई भी कीं। शिकायत पर उपनिदेशक बस्ती व इलाहाबाद को जांच अधिकारी नामित किया गया।
जांच शुरू हुई तो गेटपास की दूसरी व तीसरी कापी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अभय प्रताप के हस्ताक्षर मिले, लेकिन वजन व धनराशि दर्ज नहीं थी। अन्य अनियमितताएं भी मिलने पर जून में डीडी मंडी कानपुर ने चतुर्थश्रेणी कर्मचारी को निलंबित करने के साथ एफआईआर कराई थी। मंडी सहायक श्याम सिंह को निलंबित किया था।
इस खेल में तीन बड़े आढ़तियों के शामिल होने की पुष्टि पर उनकी फर्मों का काम बंद कर दिया गया। इस जांच में तत्कालीन मंडी सचिव, आढ़ती व कर्मचारी सहित आठ लोगों का फंसना तय माना जा रहा है।
जांच अधिकारी जिला बस्ती मंडी के उपनिदेशक मृत्युंजय राम ने बताया कि सातनपुर मंडी सचिव से पांच बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। शीघ्र ही जांच पूरी कर ली जाएगी। मंडी सचिव डा.दिलीप कुमार वर्मा ने बताया कि रिपोर्ट भेजी जा रही है।
उपनिदेशक मंडी कानपुर संभाग अजीत सिंह ने बताया कि तत्कालीन मंडी सचिव को कई नोटिस भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी से जांच में विलंब हुआ। उन्होंने बताया कि जांच अंतिम दौर में है। जांच रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।