फर्रुखाबाद। बिना मानक के स्लीपर बसों के संचालन में माफिया, पुलिस व परिवहन निगम का सिंडीकेट काम कर रहा है। इसके चलते ही इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कन्नौज के छिबरामऊ थाने के घिलोई में ट्रक से टकराने के बाद आग का गोला बनी चतुर्वेदी बस सर्विस के मामले में जांच की गई, तो इसी फर्म की 17 बसें ऐसी मिलीं, जिनको सामान्य से स्लीपर बसों में बदला गया था। इसके बाद दो एआरटीओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लेकिन, बाद में इस मामले में एफआर लगा दी गई थी।
बस माफिया का साथ पुलिस, परिवहन निगम सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी देते हैं। इसी के चलते सामान्य बसों को भी स्लीपर में गलत तरीके से दर्ज कर लिया जाता है। यह खेल वर्ष 2020 में घिलोई में चतुर्वेदी बस सेवा की स्लीपर बस में आग लगने से दस लोगों के जिंदा जलने की घटना के बाद जांच में खुला था।
पता चला था कि 17 सामान्य बसों को गलत तरीके से स्लीपर में बदला गया है। इसके बाद पूर्व में तैनात रहे एआरटीओ मोहम्मद हसीब व घटना के समय तैनात रहे एआरटीओ शशिभूषण पांडेय के खिलाफ कानपुर आरटीओ प्रवर्तन राकेश कुमार ने फतेहगढ़ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि सामान्य से स्लीपर में गलत तरीके से बदली गईं 17 बसों की फाइलें ही एआरटीओ कार्यालय से चोरी हो गई हैं। फाइलों की चोरी किए जाने की भी प्राथमिकी फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज की गई थी। पर पुलिस फाइलें बरामद नहीं कर सकी। इस मामले में दोनों एआरटीओ के निलंबन की भी कार्रवाई की गई थी।