फर्रुखाबाद। रविवार को आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर का 57 वां जन्म दिन मनाया गया। अनुयायियों ने केक काटकर उनकी शिक्षाओं के अनुसरण का संकल्प दोहराया। महिलाओं ने मंगल गीत व भजन भी गाए। इस मौके पर आयोजन स्थल को भव्य तरीके से सजाया गया था।
सेनापति मोहल्ले के सरस्वती शिशु मंदिर में श्री श्री रविशंकर के जन्म दिन पर उत्सव मनाया गया। परिसर को गुब्बारों व फूलों की लड़ियों से सजाया गया था। गुब्बारों में टाफी व पंखुड़ियां भरी गई थीं। रविशंकर के चित्र पर चंदन का टीका लगाने के बाद बंगलौर से आए उनके शिष्य भावेन ने केक काटी। केक कटते ही अनुयायी हैप्पी बर्थ डे बोल उठे। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों ने गुब्बारे फोड़ दिए। सभी को चंदन का टीका लगाया गया। इसके बाद भजनों का कार्यक्रम शुरू हुआ। ढोलक की थापों पर जहां जहां गुरू चरण पड़े, सागर में एक लहर उठी तेरे नाम की, तुझे मुबारक खुशियां आत्म ज्ञान की , भजनों की रस धार बहती रही। यहां ध्यान व योग के कार्यक्रम भी हुए। भावेन ने सत्संग करते हुए कहा कि गुरू का अपने शिष्य के प्रति अटूट संबंध होता है। गुरू की शिक्षाएं अनमोल हैं। आयोजन में मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, रामकृपाल मिश्रा, संदीप अग्रवाल, संजय गर्ग, मधु सक्सेना, निमिष टंडन, देवकीनंदन गंगवार,रूचि अग्रवाल, श्रुति अग्रवाल, सुरभि अग्रवाल, परिंदा टाक, आकांक्षा मिश्रा, मनीष बिसारिया, अरूणेंद्र श्रीमाली, सुनील शर्मा, राम सक्सेना, सुरेश चंद्र गुप्ता, त्रिलोकी नाथ आदि मौजूद रहे।