फर्रुखाबाद। मिड डे मील योजना में स्कूली बच्चों के भोजन की अधिकांश राशि खुद ही खा जाने वाले पूर्व ग्राम प्रधानों पर नए जिलाधिकारी ने नकेल कसी है। जांच पड़ताल में उन्होंने पाया है कि विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पचास फीसदी से कम रही है और पूर्व ग्राम प्रधानों ने मिड डे मील योजना के खाद्यान्न के अलावा परिवर्धन लागत बच्चों के स्कूल में पंजीकरण के हिसाब से ली थी। डीएम ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी पूर्व ग्राम प्रधानों को चिंहित कर उन्हें आरसी जारी करें और धनराशि की वसूली करें।
जिलाधिकारी डा.मुथुकुमार स्वामी बी. ने बुधवार को जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक कर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की। जिसमे परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील आंगनवाड़ी केंद्रों में पुष्टहार योजना की समीक्षा की। इससे पहले जिलाधिकारी ने होमवर्क करके यह पता लगा लिया था कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पचास फीसदी से कम रही है। जबकि मिड डे मील और कन्वर्जन कास्ट सभी पंजीकृत बच्चों के हिसाब से पूर्व प्रधानों ने लिया था। बुधवार की बैठक में जिलाधिकारी ने उसी बिंदु से अपनी बात शुरू की। कहा कि बच्चों की उपस्थित स्कूलों में कम रहने से प्रधानों के पास खाद्यान्न और परिवर्धन राशि का शेष होना स्वाभाविक है। जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को निर्देश दिया कि ऐसे प्रधानों को चिंहित कर उनसे शेष खाद्यान्न और परिवर्धन राशि की वसूली के लिए आर.सी. जारी करें। इसके साथ ही वसूली की कार्रवाई भी तेज करें।
डीएम ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि शिक्षक विद्यालय नहीं जाते। इसलिए सभी उप जिलाधिकारी, खंड शिक्षाधिकारी, नगर शिक्षाधिकारी एक माह में दस विद्यालयों का निरीक्षण करके उन्हें रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। डीएम ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पुष्टाहार देने में भी हेरफेर नजर आता है क्योंकि आंगनवाड़ी कार्यकत्री अपने केंद्रों पर पुष्टहार वितरण को लिखापढ़ी में नहीं रखतीं। कहा कि विद्यालय न पहुंचने वाले शिक्षकों और पुष्टाहार में घपले करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। डीएम ने कहा कि वे खुद निरीक्षण करेंगे। अगर मौके पर कोई कमी मिली तो वे निरीक्षण अधिकारी को भी दोषी मानते हुए दंडात्मक कार्यवाही करेंगे।