कायमगंज। कस्बे में स्थित सहकारी चीनी मिल में गजब का खेल चल रहा है। एक तरफ मिल प्रबंधन गन्ना का टोटा होने की बात कह रहा है तो दूसरी तरफ तमाम किसान पर्ची न मिलने की दुहाई दे रहे हैं। ऐसे में कौन सही बोल रहा है और कौन झूठ, यह तो प्रशासनिक जांच के बाद भी सामने आएगा, लेकिन इतना तो तय है कि मिल के आसपास मौजूद किसान एक के बाद एक समस्या गिनाकर प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं। किसान अधिकारियों की ओर से 30 तारीख तक की पर्ची जारी किए जाने के दावों की भी खोल रहे हैं।
चीनी मिल के पेराई सत्र का उद्घाटन करते हुए जिलाधिकारी एनकेएस चौहान ने किसानों की तमाम समस्याओं के समाधान का दावा किया था। मिल महाप्रबंधक का कहना था कि 24 से 30 नवंबर तक की पर्चियां जारी कर दी गई हैं, लेकिन पड़ताल के दौरान यह दावा हवाई निकला। उद्घाटन के चार दिन बाद भी मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पाया है। काउंटर पर रोज किसानों की भीड़ उमड़ रही है। मिल प्रबंधन की मानें तो गन्ने के लिए मिल गांव गांव मुनादी करवा रही है। पर्ची वितरकों के माध्यम से किसानों को पर्ची के साथ-साथ मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से भी जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद मिल को गन्ना नहीं मिल पा रहा है।
मिल ने जारी की परचीं, किसानाें को नहीं मिलीं
समस्या की पड़ताल के लिए मिल में जानकारी की गई। यहां टोकन काउंटर पर दो दर्जन से अधिक किसानाें की भीड़ थी। अर्जुन नगला के रूम सिंह, भीमनगर के कृपाल सिंह, कुद्दीपुर के सुखवीर, बिल्हा के नाहर सिंह, दूंदेमई के ब्रहमजीत, अलियापुर के राजवीर आदि ने बताया कि उनके पास अभी तक एक भी पर्ची नहीं पहुंची है। कंप्यूटर पर जानकारी करने पर पता चला कि उनकी पर्चियां जारी कर दी गईं। इन्हाेंने बताया कि गन्ने की छोल शुरू करा दी है। यदि समय से पर्ची न मिली तो उन्हें मजबूरन क्रेशर पर गन्ना सस्ते दामों में बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।
क्या कह रहे जिम्मेदार
मिल के महाप्रबंधक डीके सक्सेना ने बताया कि मिल द्वारा इस बार भी 20 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस बार गन्ने के अभाव में मिल कम समय तक ही चलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि किसानों को पर्चियां जारी किए जाने के साथ ही 18 तौल केंद्र भी शुरू कराए जा चुके हैं। मिल द्वारा अब तक 70 हजार क्विंटल गन्ने की पर्चियां जारी की जा चुकी हैं ।