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गंगा में लावारिस शव तो फेंक रहे पर प्रतिमाओं से परहेज

Sun, 05 Oct 2014 05:33 AM IST
Farrukhabad
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फर्रुखाबाद। गंगा या किसी भी दूसरी नदी में प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी गई है। इसमें प्रशासन खासी सख्ती बरत रहा है। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान शहर व जहानगंज के लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। उधर, लावारिस शवों को नदी में बहाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसको लेकर लोगों में गुस्सा पनपने लगा है कि मूर्तियों से नदियां प्रदूषित हो रहीं हैं तो उसमें बहाए जाने वाले शवों का क्या जिनसे कई गुना ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है। जरूरी है कि नदी में शव बहाए जाने पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
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नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर पिछले दिनों शासन ने प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी है। पिछले दिनों शहर के गंगानगर में 7 को नामजद करने के साथ ही 25 अज्ञात लोगाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जहानगंज थाना इलाके के 25 नामजदाें व 150 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मुकदमा भी गणपति प्रतिमा को गंगा में बहाने पर हुआ है। इस बीच या इससे पहले गंगा में लावारिश शव बहाने में मुकदमा दर्ज करने की पुलिस के पास कोई नजीर नहीं है। उधर, शव मिलने का सालाना औसत 25 से 30 का है। प्रशासन के दो तरफा रवैया से लोगाें में नाराजगी बनने लगी है। इन शवाें की अंत्येष्टि के लिए पुलिस को बजट भी मिलता है। हाल ही में डीएम एनकेएस चौहान ने इस मामले को गंभीरता से लिया था। शवाें को गंगा में बहाने पर उन्हाेंने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद भी यह गोरखधंधा जारी है।
प्रशासन के दो तरफ ा रवैये का कमालगंज में विरोध शुरू हो गया है। विश्व हिंदू परिषद नेताआें ने इस मुखालफत की कमान संभाली है। इसमें आम आदमी भी शामिल है। विहिप ने गंगा में शव बहाना बंद न होने पर आंदोलन का एलान कर दिया है। इनका साफ कहना है कि गंगा में मूर्ति विसर्जन करने वालाें पर मुकदमे लिखे जा रहे हैं। शव बहाने वालाें को बख्शा जा रहा है। यह काम कोई और नहीं पुलिस ही कर रही है। पुलिस लावारिस शवों को गंगा में बहाकर हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रही है।
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विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय संरक्षक देवी सहाय पॉलीवाल ने कहा कि हाईकोर्ट ने गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा रखी है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन लावारिस शव गंगा में बहा रहा है। यह तब है जब इनके अंतिम संस्कार के लिए शासन से बजट मिलता है। मूर्ति विसर्जन करने पर पुलिस मुकदमे दर्ज करती है और खुद ही हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाती है। इसका विरोध किया जाएगा। कहा कि गंगा मूर्ति विसर्जन के बजाय लावारिस शव बहाने से गंदी हो रही हैं। नदी में शव बहाना मानवीय दृष्टिकोण से भी गलत है। जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे। मिलने वाले बजट से ही शवों का अंतिम संस्कार किया जाए। पशु क्रूरता समिति के सदस्य मुक्तिबोध पॉलीवाल ने कहा कि मूर्ति विसर्जन पर तो पुलिस लोगों पर मुकदमे दर्ज कर रही है लेकिन गंगा में शव फेंके जाने पर ध्यान नहीं दे रही है। कहा कि वह शीघ्र ही जिलाधिकारी से इस संबंध में मिलकर ज्ञापन देंगे। पेश इमाम मौलाना अब्दुल मुवीन और गालिब मियां ने संयुक्त रूप से कहा कि अगर पुलिस प्रशासन के पास शवों के अंतिम संस्कार के लिए बजट नहीं है तो पुलिस उनके समुदाय के मिले शवों को उन्हें सौंप दे। वह अपने स्तर से ऐसे शवों का अंतिम संस्कार कर देंगे।
यह कहता है शासनादेश
अज्ञात शव मिलने पर फोटो खिंचवानी चाहिए। शव का पोस्टमार्टम कराया जाए। शिनाख्त कराने को लगभग 48 घंटे तक शव मोर्चरी में रखा जाए। अगर शिनाख्त नहीं होती है, तो उसका अंतिम संस्कार किया जाए। इससे पहले अगर मरने वाले का धर्म पता चल जाए तो उसका अंतिम संस्कार उसी धर्म के नियमों के अनुसार होना चाहिए। शव से जो कपड़े बरामद होते हैं। इनको शिनाख्त के लिए संबंधित थाने में सुरक्षित रखे जाने के आदेश हैं।

यह होता है
जिस शव की शिनाख्त नहीं होती है। पुलिस उस शव की फोटो और पोस्टमार्टम कराती है। जिसका शव मिला उसकी शिनाख्त कर धर्म से ताल्लुकात जाने बिना गंगा में बहा दिया जाता है। जहां विरोध होता है, वहां जमीन में गड्ढा कर शव को दफन कर दिया जाता। शिनाख्त की पुलिस ज्यादा कवायद नहीं करती है।

लावारिस के अंतिम संस्कार को 1500 रुपये
लावारिस शव के अंतिम संस्कार को प्रदेश सरकार से पुलिस विभाग को प्रति शव 1500 रुपये के हिसाब से मिलते हैं। यह धनराशि प्रतिवर्ष मिलने वाले लावारिस शवोंके आंकड़ों के अनुसार शासन से आती है।
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