फर्रुखाबाद। मनरेगा से 10 महीने में महज 19 करोड़ खर्च हो पाए हैं। अब प्रशासन को 60 दिन में 14 करोड़ रुपये खर्च करने की बाजीगरी दिखानी है। 31 मार्च तक यह रकम खर्च नहीं हो पाई तो कार्रवाई हो सकती है। इसको लेकर अधिकारी परेशान हैं।
जिले को 2015-2016 केे वित्तीय सत्र में 33 करोड़ रुपये का मनरेगा से बजट मिला था। जिला पंचायत और ग्राम पंचायत चुनाव के चलते काम में व्यवधान बना रहा। नतीजन जनवरी के जाते जाते 19 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। मनरेगा की धीमी रफ्तार से शासन कई बार हाकिमों से नाराजगी जाहिर कर चुका है। अब बाकी बजट यानी 14 करोड़ रुपये को 31 मार्च तक खर्च करना है। इसके लिए महज 60 दिन हैं।
जिले में 1 लाख 65 हजार जॉबकार्डधारक पंजीकृत हैं। इनमें से 59 हजार ही काम कर रहे हैं। इसके बाद भी हालत यह है कि 603 ग्राम पंचायतों में से 274 में ही काम चल रहा है। 329 ग्राम पंचायतों में काम ही नहीं चल रहा है। इससे तय समय में पांच करोड़ रुपये खर्च हो पाना भी मुनासिब नहीं लग रहा है।
लापरवाही में सीडीओ एसएन शुक्ल, प्रभारी खंड विकास अधिकारियों को मध्यावधि प्रतिकूल प्रविष्टि दे चुके हैं। इसके बाद भी नतीजा सिफर है। सीडीओ का कहना है कि शासन मनरेगा को लेकर संजीदा है। ग्राम प्रधानों व खंड विकास अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। सभी ग्राम सभाओं में जल्द काम शुरू करवाया जाएगा।
ये हैं मुश्किलें
- जिले में केवल कायमगंज विकास खंड में बीडीओ की तैनाती है। बाकी छह विकास खंडों में जिला स्तरीय प्रभारी अधिकारी काम देख रहे हैं। दो विभागाें के बीच इनके लिए सामंजस्य बनाना मुश्किल हो रहा है।
- लेखपाल पैमाइश में लापरवाही बरतते हैं। इससे काम में देरी होती है। इसकी कई बार शिकायतें भी हो चुकी हैं।
- मनरेगा में 168 रुपये मजदूरी मिलती है। बाकी जगह मजदूराें को 250 रुपये मिल जाते हैं। इससे यह भी दिलचस्पी नहीं लेते हैं।