फर्रुखाबाद। अन्ना मवेशियों को संरक्षण देने के लिए गोसदन खोले जा रहे हैं। वृहद गो संरक्षण केंद्र से लेकर निजी, राजकीय व अस्थाई गोसदनों में हजारों की तादाद में पशु रखने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा। हालांकि इन बेसहारा पशुओं की सेहत का किसी को ध्यान नहीं है। 15 डॉक्टर व चार फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है। जबकि सभी स्थाई व अस्थाई गोसदन बनने पर इनकी संख्या 32 हो जाएगी। इससे गोसदनों से लेकर पालतू मवेशियों का इलाज पशु पालन विभाग के लिए चुनौती है।
अन्ना मवेशी फसलें बर्बाद कर रहे हैं। कई जगह तो शांति व्यवस्था भी भंग हो रही है। इसके चलते शासन गोसंरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। शहर में धर्मपुर कटरी स्थित राजकीय गोसदन के अलावा कायमगंज में भगवती गोशाला, शमसाबाद केे बैरमपुर में पुण्यभूमि, टोका घाट स्थित गौरक्षिणी सभा व मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव सिरौली में चल रहे निजी गोसदन पहले से पंजीकृत हैं।
अब मोहम्मदाबाद केेेे गांव नवादा दोयम में वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण भी शुरू होने को है। इसके अलावा शहर में तीन अस्थाई गोसंरक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में स्वीकृत 26 अस्थाई गोसदनों को बाद में स्थाई किए जाने की योजना है। इन सभी गोसदनों में 4000 से अधिक गोवंश रखने की व्यवस्था की जा रही है। इनके लिए छाया, पानी व चारा के इंतजाम पर भी लाखों रुपये का बजट खर्च होगा। पशुओं के सेहत की जिम्मेदारी पशु पालन विभाग पर है। हालात यह हैं कि विभाग पहले से ही स्वीकृत डॉक्टर, फार्मासिस्ट व कर्मचारियों के सापेक्ष 53 फीसदी तैनाती से ही काम चला रहा है, जबकि 46 फीसदी पद रिक्त हैं। 11 चिकित्सकों व इतने ही फार्मासिस्ट के पद खाली हैं। इतने स्टाफ से पालतू व अन्ना पशुओं की सेहत की जिम्मेदारी उठाना चुनौती है।