फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

40 फीसदी विषाक्त हुआ गंगा जल

Fri, 03 Mar 2017 10:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
विज्ञापन
गंगा नदी में गिर रहा शहर का गंदा नाला। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
जीवनदायिनी गंगा का जल यहां 40 फीसदी प्रदूषित हो गया है। इसका कारण गंदे नालों का पानी और गजरौला की चमड़ा फैक्ट्री के गंदे पानी ने नदी में इस कदर जहर घोल दिया है कि अब यह आचमन योग्य नहीं रहा है।
विज्ञापन



गंगा प्रदूषण निवारण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजकिशोर मिश्र के अनुसार सिविल अभियंत्रिकी विभाग भारतीय तकनीकि संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार गंगा नदी में प्रदूषण प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। गंगा कार्य योजना के एक विशेष दल ने हाल ही में गंगा का सर्वे कर  रिपोर्ट दी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक ए श्रेणी के 39 शहर, बी श्रेणी के 23 शहर और 48 अन्य उप नगर अपने अवशिष्ट आज भी गंगा में गिरा रहे हैं। फर्रुखाबाद व अन्य शहरों के किनारे धोबी गंगा में कपड़े धोकर गंगा जल को दूषित कर रहे हैं। कार्य योजना के विशेष दल की रिपोर्ट में गंगा को सर्वाधिक प्रदूषित माना गया और कहा गया कि 100 करोड़ लीटर अवशिष्ट प्रतिदिन प्रवाहित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन



राष्ट्रीय अध्यक्ष ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का खुलासा करते हुए बताया कि गंगा तट पर फर्रुखाबाद काफी हद तक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। स्थानीय छपाई उद्योग के विषाक्त अवशिष्ट को सीधे नदी में गिराया जा रहा है। आर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड गजरौला मुरादाबाद अपने उत्सर्जित दूषित पदार्थ पहले महावर नदी के जरिये कछला (एटा) में गिराते थे। पहले इसे बंद कर दिया गया था। अब यह फिर से गंगा नदी में गिराए जाने लगे हैं। महावर नदी बदायूं के कटरी हुसैनपुर में गंगा में मिल जाती है, जो कि बदायूं, कासगंज, सोरों, कंपिल होते हुए फर्रुखाबाद में आती है।


फर्रुखाबाद में टोकाघाट नाला, मिलेेट्रीवाला नाला और जिलाधिकारी निवास के समीप बहता काला नाला टोकाघाट पर गंगा में गिरते हैं, जिससे प्रदूषण की मात्रा दोगुनी हो जाती है। गंगा में सर्वाधिक प्रदूषण शहर से गिराए जाने वाले नाले करते हैं। हालांकि टोकाघाट के नाले को टेप किया जा चुका है

लेकिन उत्कृष्ट कार्य न होने के कारण यह नाला मलबे को ज्यों का त्यों गंगा में फेंक देता है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रदूषण का एक अन्य कारण यह भी है कि फर्रुखाबाद में गंगा के दोनों तटों पर शवों को जलाया जाता है और परिवारीजन शवों के अधजले अवशेष गंगा में बहाते हैं।


लावारिश शवों के पोस्टमार्टम के बाद निस्तारण में जिला प्रशासन उदासीनता बरत रहा है। पुलिसवाले शवों को बिना अंतिम संस्कार किए गंगा में फेंक देते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार गंगा जल में खनिजों की अधिकता पाई गई है। औद्योगिक संगठनों, कारखानों तथा अन्य विषाक्त अवशिष्टों के साथ अनेक प्रकार की धातु जैसे लोहा, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम, पोटेशियम, जिंक, गिल्ट और पोवाल्ट आदि गंगा में पहुंचकर उसके जल को अस्तित्व विहीन कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न स्थानों के नमूने लेकर गंगा जल का परीक्षण किया गया तो पाया गया कि धातुओं की मात्रा तेजी से बढ़ रही है, जो मानव, पशु, पक्षी और प्रकृति के लिए अत्यंत हानिकारक है। गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण की रिपोर्ट को गंगा प्रदूषण नियंत्रण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजकिशोर मिश्र ने एक माह पहले उमा भारती को सौंपी है लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


फर्रुखाबाद से गजरौला तक के खतरनाक अवशिष्ट गंगा में गिराने और कालीनदी का जहरीला पानी कन्नौज के पास गंगा में मिलने के कारण कानपुर में गंगाजल बेहद प्रदूषित हो गया है। इसके लिए फर्रुखाबाद के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। प्रदूषण रोकने के लिए जिला स्तर से उपाए किए जाएंगे।
शिवबहादुर पटेल (नगर मजिस्ट्रेट)


गंगा नदी में गंदे नालों को टेप करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। बजट देकर नाला टेप कराना कार्य केंद्र सरकार का है। नगर पालिका का इसमें कोई रोल नहीं है। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि गंगा के जल को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए शासन-प्रशासन को लिखा जाए।
विज्ञापन

वत्सला अग्रवाल (पालिकाध्यक्ष)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें