फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला उद्योग केंद्र में वसूली को लेकर हंगामा

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार युवाओं को रोजगार देने का प्रयास कर रही है। वहीं जिला उद्योग केंद्र के जिम्मेदार सरकारी योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया बनाए हैं। वह युवाओं के जीवन से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। रिश्वतखोरी की शिकायत पर शनिवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी जांच करने पहुंचे तो मामले का खुलासा हुआ।
विज्ञापन



इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को रविवार 12 बजे तक एफआईआर दर्ज कराने के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से युवकों को मैकेनिक लाइन व युवतियों को सिलाई कढ़ाई आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।


इसके साथ ही उन्हें प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रमाणपत्र व प्रशिक्षण भत्ता की पांच हजार रुपये का चेक दिया जाता है। हालात यह हैं कि मनमाने तरीके से प्रशिक्षण के लिए युवक-युवतियों के आवेदन कर लिए जाते और बाद में प्रशिक्षण भत्ता चेक वितरण में जमकर वसूली का खेल चलता है।
विज्ञापन



प्रशिक्षण लेने वाले युवक व युवतियों का आरोप है कि वर्ष 2018-19 में फार्म भरने के बाद उन्हें कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया। शुक्रवार को उद्योग केंद्र से फोन कर बताया गया कि उनकी पांच हजार का चेक आ गया है। दो हजार रुपये लेकर आओ और अपना चेक ले जाओ।


वहां पहुंचे कुछ प्रशिक्षुओं ने रुपये नहीं दिए तो उन्हें चेक देने से मना कर दिया गया। इसको लेकर वहां जमकर हंगामा हुआ। इसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराते हुए घटना की जानकारी जिलाधिकारी को दी। इस पर सीडीओ ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को जांच सौंपी।


जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद ने सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि जब वह मौके पर गए तो जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक का कार्यालय बंद था। वहां कोई अधिकारी व कर्मचारी भी नहीं मिला। कार्यालय भवन में चार-पांच मजदूर टाइल्स लगाने व रंगाई पुताई का काम कर रहे थे।


पूछताछ में मजदूरों ने बताया कि लंबा-चौड़ा सांवले रंग का एक व्यक्ति आया था। इसके कुछ देर बाद दो-तीन लड़कियां पहुंचीं। उस व्यक्ति से चेक को लेकर कुछ बातचीत हुई। इसके बाद दो युवक कार्यालय आए और युवकों ने उस व्यक्ति पर दो-दो हजार रुपये लेकर चेक देने का आरोप लगाया।


इसी को लेकर बहस हुई। इसके बाद पहुंची पुलिस के सामने भी नोकझोंक हुई। इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।


इसके साथ ही मामले की खुद जांच कर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। इस संदर्भ में महाप्रबंधक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं है। वह दोपहर को कलक्ट्रेट में बैठक में गए थे।
विज्ञापन



जिला उद्योग केंद्र में वसूली को लेकर हंगामा

डीपीओ की जांच रिपोर्ट पर एफआईआर के आदेश

जीएम से स्वत: जांच स्पष्टीकरण देने के निर्देश
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें