फर्रुखाबाद। नवाबगंज ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुतुबुद्दीनपुर में शौचालय निर्माण में लाखों का गोलमाल हुआ। जांच में 28 शौचालय गायब मिले, जबकि 17 अपूर्ण हैं। जिलाधिकारी ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
ग्राम पंचायत कुतुबुद्दीनपुर निवासी राघवेंद्र सिंह रिंकू ने जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह से शिकायत कर शौचालय निर्माण में गबन का आरोप लगाया था। उन्होंने शिकायत में 40 शौचालय का निर्माण न कराने और 40 अधूरे होने की बात कही थी।
डीएम के आदेश पर आठ दिसंबर को डीपीआरओे उमाशंकर मिश्र कमेटी के साथ जांच करने गए तो उनके सामने ही तत्कालीन प्रधान पक्ष ने शिकायतकर्ता से ही मारपीट कर दी। इससे बिना जांच के ही डीपीआरओ को लौटना पड़ा था। उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर जांच के लिए पुलिस बल का सहयोग मांगा था।
इसके बाद डीपीआरओ अवकाश पर चले गए। 28 जनवरी को एडीपीआरओ राजेश चौरसिया ने पुलिस बल के साथ गांव में जांच की। उन्होंने डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि 28 शौचालय बनाए ही नहीं गए, जबकि 17 शौचालय अपूर्ण हैं।
एडीपीआरओ ने धनराशि के दुरुपयोग में तत्कालीन प्रधान, सचिव व खंड प्रेरक को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है। इस पर डीएम ने सीडीओ को कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
प्रभारी सीडीओ/डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि अभी जांच रिपोर्ट मिली नहीं है। जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
जांच पर उठ रहे सवाल
एडीपीआरओ राजेश चौरसिया की जांच रिपोर्ट में प्रधान को बचाने का प्रयास जाहिर हो रहा है। उन्होंने अपूर्ण शौचालय की जांच रिपोर्ट में लाभार्थियों द्वारा शौचालय खुद ही तोड़ने का उल्लेख किया है। वहीं, लाभार्थी व शिकायतकर्ता का कहना है कि शौचालय का पूरा निर्माण कराया ही नहीं गया। जांच के दौरान एडीपीआरओ से यह भी शिकायत की गई, निर्माण होने के साथ नाली भी टूट रही है। गुणवत्ता काफी खराब है। अपात्रों से वसूली कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास दिए गए। एडीपीआरओ ने इन शिकायतों की जांच ही नहीं की। आरोप है कि जांच के बाद तत्कालीन प्रधान के परिजनों से करीब दो घंटे बातचीत भी होती रही। एडीपीआरओ ने बताया कि तत्कालीन प्रधान के परिजनों से उनका पक्ष सुनने के लिए बात हुई थी। टीमें लगाकर जांच कराई थी। उसी हिसाब से शौचालय निर्माण की जांच रिपोर्ट बनाई है।