फर्रुखाबाद। अनुपम दुबे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इंस्पेक्टर हत्याकांड में मथुरा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे माफिया व बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे पर जेल जाने के बाद आपराधिक मुकदमों की झड़ी लग गई।
माफिया पर गिरफ्तारी के समय 38 मुकदमे थे। वहीं अब तक पुलिस ने 65 मुकदमे दर्ज कर चुकी है। उसके भाइयों के साथ ही करीबियों पर भी गैंगस्टर जैसे मुकदमे दर्ज किए गए।
कोर्ट ने कहा कि अनुपम का भाई फरार है तो उसके पीछे की वजह यह है कि वह जानता है कि पुलिस फिर एक नया मुकदमा दर्ज कर देगी। कोर्ट ने कहा कि अगर दुबे को छुआ तो हम इतना सख्त आदेश देंगे कि उन्हें जीवन भर याद रहेगा।इस तरह की टिप्पणी से एक बार फिर अनुपम दुबे प्रकरण ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
प्रशासनिक कार्रवाई में तालाब की भूमि पर बने माफिया के आलीशान होटल को जमींदोज कर दिया गया। कभी राजनीतिक गलियारों में रसूख रखने वाले माफिया पर धीरे-धीरे कानून का शिकंजा कसता ही चला गया। एक दौरा ऐसा भी आया कि पुलिस के खौफ से अनुपम दुबे का नाम लेने से भी लोग कतराने लगे थे।
अनुपम का अर्श से फर्श तक का सफर : अनुपम दुबे पर पहला मारपीट का मुकदमा 1987 में दर्ज हुआ था। 13 जुलाई 2021 को इंस्पेक्टर रामनरेश हत्याकांड में जीआरपी कानपुर ने स्थानीय पुलिस के साथ फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी माफिया व बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे के यहां दबिश दी थी। 14 जुलाई को बसपा नेता ने कोर्ट में लकड़ी ठेकेदार शमीम हत्याकांड कें मामले में आत्मसमर्पण कर दिया था।
बताते हैं कि जिस समय अनुपम दुबे कोर्ट में हाजिर हुआ था, उस समय उस पर 38 मुकदमे दर्ज थे। इसके बाद उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने का सिलसिला चल पड़ा। जेल में बंद रहते हुए तीन साल में अनुपम दुबे के खिलाफ 27 मुकदमे और दर्ज हो चुके हैं। उस पर अब तक विभिन्न जनपदों में 65 मुकदमे दर्ज हैं।
यही नहीं उसके ब्लॉक प्रमुख भाई अमित दुबे उर्फ बब्बन और फरार चल रहे अनुराग दुबे उर्फ डब्बन पर भी कई मुकदमे दर्ज किए गए। बब्बन मौजूदा समय में हरदोई जेल में बंद है। वहीं माफिया अनुपम दुबे को पहले जिला जेल में दाखिल किया गया। इसके बाद मैनपुरी, वहां से फिरोजाबाद और आगरा जेल भेजा गया। दिसंबर 2023 को अनुपम दुबे को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के इंस्पेक्टर मेरठ निवासी राम निवास यादव की हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मौजूदा समय में माफिया अनुपम दुबे मथुरा जेल में निरुद्ध है।
इंस्पेक्टर राम निवास यादव की 14 मई 1996 को पैसेंजर ट्रेन में अनवरगंज स्टेशन पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जीआरपी थाने में बसपा नेता अनुपम दुबे के साथ नेम सिंह उर्फ बिलइया और कौशल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।