फर्रुखाबाद। रेलवे की लापरवाही से जिले के आलू किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। किसानों ने असम के लिए 11 किसान रेल रैक बुक कराई थी। रेलवे इन्हें उपलब्ध नहीं करवा सका। लिहाजा करीब 2500 टन आलू जिले से बाहर नहीं जा सका। मजबूरन किसानों ने बुकिंग निरस्त कर 11 लाख रुपये की जमानत राशि वापस ले ली।
आलू की मंदी से बर्बाद किसानों के आंसू पोंछने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने जिले का आलू गैर प्रांत भेजने पर किसान रेल रैक की व्यवस्था की। इसमें किसान को किराए में 50 फीसदी छूट प्रदान की जाती है। किसानों ने आलू की सीजन में 45 रैक बुक कराई। पिछले करीब एक माह से रेल विभाग किसानों को 11 रैक उपलब्ध नहीं करवा सके। इनको असम के जोरहाट, बेहाटा आदि शहरों को जाना था। एक रैक में करीब 225 टन आलू लोड होता है। कई बार रिमाइंडर देने के बाद बी जब रेलवे के इज्जतनगर मंडल से रैक उपलब्ध नहीं कराई गई, तो किसानों ने इन्हें निरस्त करवा दिया। एक रैक को बुक कराते वक्त एक लाख रुपये जमानत राशि के रूप में जमा होती है। किसानों को रेल विभाग ने 11 लाख रुपये की जमानत राशि भी वापस कर दी। सवारी ढोने के डिब्बों में खराब नहीं होता आलू रैक बुक कराने वाले किसान मनोज कुमार ने बताया कि किसान रेल रैक में सवारी गाड़ी के जनरल डिब्बे होते हैं। लिहाजा आलू के बोरों में रास्ते भर हवा लगती जाती है। लिहाजा अधिक दूरी तक आलू को बिना खराब हुए ले जाया जा सकता है। मालगाड़ी के डिब्बे में गर्मी की वजह से आलू खराब होने का डर रहता है।
इस बार आलू की सीजन में किसानों ने रेलवे मालगोदाम से 34 किसान रेल रैक बुक कराईं। एक डिब्बे में 15 टन आलू जाता है। एक रैक में औसतन 15 ही रैक लगाई जाती हैं। लिहाजा करीब 76 सौ टन जिले का आलू गैर प्रांत भेजा गया। इससे किसानों को काफी राहत मिली।