फर्रुखाबाद। यूपी बोर्ड परीक्षाएं शनिवार को खत्म हो गई हैं। करीब 24 दिन चली परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए 6 सचल दल लगाए गए थे। इसके अलावा 28 स्टेटिक मजिस्ट्रेट, 11 सेक्टर व पांच जोनल मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। इनकी दौड़ भाग में करीब 82 हजार रुपये से अधिक का डीजल खर्च हो गया। पर, पूरी परीक्षा में सचल दल एक ही नकलची को पकड़ सका, जबकि दो नकलची केंद्र व्यवस्थापक ने पकड़े हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं के लिए इस बार जनपद में सेंट्रल जेल सहित 61 केंद्र बनाए गए थे। इन पर हाईस्कूल के 26281 व इंटरमीडिएट 19656 के परीक्षार्थी पंजीकृत थे। परीक्षा सुचारु रूप से हो इसके लिए 2100 कक्ष निरीक्षक माध्यमिक के और 1000 कक्ष निरीक्षक बेसिक शिक्षा विभाग के लगाए गए थे। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में दो-दो सीसीटीवी कैमरे वायस रिकार्डर के साथ लगे थे। इसके बाद भी नकल होने की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचती रहीं। पर, अधिकारी अपने में ही मस्त रहे।
इसी का नतीजा रहा कि राजेंद्र नगर स्थित राजेंद्र सिंह पब्लिक इंटर कालेज में भौतिक विज्ञान का पेपर समय से पहले खोल दिया गया और स्टेटिक मजिस्ट्रेट के पहुंचने पर वहां भगदड़ मच गई। इससे वहां सॉल्वर के होने की आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया। चंदुइया स्थित केंद्र पर भी सॉल्वर होने का मामला सामने आने पर जांच शुरू कराई गई। इन सब के बीच छह सचल दल, स्टेटिक, सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट अपनी गाड़ियों से नकल रोकने को दौड़ लगाते रहे। पर, सचल दल पूरी परीक्षा में एक ही नकलची पुरुषोत्तम सिंह इंटर कालेज राजेंद्र नगर केंद्र पर पकड़ सके। यह नकलची भी डीआईओएस के सचलदल ने पकड़ा। दो नकलची नवाबगंज स्थित एसकेएम इंटर कालेज चांदपुर केंद्र पर वहां के केंद्र व्यवस्थापक ने पकड़े। जबकि इन सचल दलों ने औसतन 15 दिन केंद्रों पर चक्कर लगाए। एक दिन चक्कर लगाने पर करीब 85 लीटर डीजल खर्च हो जाता था। एक लीटर डीजल की कीमत करीब 65 रुपये है। ऐसे में नकलचियों को पकड़ने पर सचल दल ने करीब 82875 हजार रुपये का डीजल खर्च कर डाला।
जिला विद्यालय निरीक्षक कमलेश बाबू ने बताया कि सख्ती के चलते ही नकल विहीन परीक्षा हो सकी। तभी नकलची नहीं पकड़ में आए। नकल करने वाले परीक्षा छोड़ गए।