अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। तहसील में पांच माह से तहसीलदार नहीं बैठ रहे हैं। इससे तहसीलदार न्यायालय में लंबित वादों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब तक करीब 350 मामले लंबित चल रहे हैं। तहसीलदार न्यायालय से ग्रामीण तारीख लेकर लौट जाते हैं। वहीं, साहब के न होने से कर्मचारी भी मनमानी ड्यूटी कर रहे हैं। इससे लोग तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
तहसील अमृतपुर के तहसीलदार राजीव निगम का 23 जून को तबादला हो गया था। 25 जून को तहसीलदार प्रदीप सिंह की नियुक्ति की गई। दो माह बाद ही उन्हें सदर तहसील भेज दिया गया। इसके बाद 24 अगस्त को तहसीलदार मिथलेश कुमार यादव की तैनाती हुई। कुछ दिनों बाद ही वह बाथरूम में फिसलकर घायल हो गए। 10 अक्तूबर से वह मेडिकल अवकाश पर चल रहे हैं। तब से बिना तहसीलदार के ही तहसील चल रही है। इससे तहसीलदार न्यायालय में लंबित मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा। ग्रामीण मुकदमे की पैरवी के लिए आते हैं। तहसीलदार न होने से उन्हें अगली तारीख दे दी जाती है। अब तक करीब 350 मामले लंबित चल रहे हैं।
अधिवक्ता विनोद प्रकाश द्विवेदी, प्रभात त्रिवेदी, रामनरेश मिश्रा, राकेश चंद्र शर्मा, शिववीर सिंह आदि ने बताया कि तहसीलदार के न बैठने से वाद निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं। तहसीलदार की नियुक्ति के लिए जिलाधिकारी से कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक तैनाती नहीं की गई है। अमृतपुर तहसील का चार्ज सदर तहसीलदार के पास है, लेकिन वह तहसील में कभी नहीं आते। इससे कर्मचारियों को पत्रावलियां लेकर हस्ताक्षर के लिए सदर तहसील जाना पड़ता है।
आलम यह है कि अधिकारियों व कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने जाने का कोई समय नहीं है। शनिवार को राजस्व निरीक्षकों के कार्यालय में ताले लगे रहे। नाजिर का कार्यालय भी चपरासी ने खोला। कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था। कर्मचारियों के न मिलने से ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही। पूर्तिनिरीक्षक कार्यालय भी यदा-कदा ही खुलता है। लोग राशन कार्ड सही कराने व नए राशन कार्ड बनवाने के लिए आते हैं, लेकिन पूर्ति निरीक्षक के न मिलने पर वह निराश होकर लौट जाते हैं। अपर जिलाधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि तहसील में जांच कराकर अनुपस्थित मिलने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।