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कोच न होने से स्टेडियम में हुए ट्रायल में बहुत कम आए खिलाड़ी

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फर्रुखाबाद। कैंप बंद होने का असर स्पोर्ट्स हॉस्टल के ट्रायल में नजर आया। पिछले साल की तुलना में इस बार चौथाई खिलाड़ी भी ट्रायल में नहीं पहुंचे। पिछले वर्ष एक खेल के जितने खिलाड़ियों को भेजा गया था, उससे बहुत कम खिलाड़ी सभी खेलों को मिलाकर रहे।
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पिछले साल 42 खिलाड़ियों को मंडल स्तर के ट्रायल के लिए भेजा गया था। इसमें से कुछ खिलाड़ियों का चयन स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए भी हो गया था। इस बार महज 16 खिलाड़ी ही हॉस्टल के चयन के लिए स्टेडियम पहुंचे। इसमें से 12 खिलाड़ियों को मंडल स्तरीय ट्रायल के लिए भेजा गया। क्रीड़ाधिकारी कर्मवीर पटेल ने बताया कि कोच के नहीं होने का फर्क पड़ता है। अच्छे खिलाड़ी कोच की नजर में होते हैं। वह अपने खिलाड़ियों को ट्रायल में बुलाते हैं। साथ ही हॉस्टल में कम उम्र के खिलाड़ियों को लिया जाता है। वह जल्द घर छोड़ने को तैयार नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में भी कोच ही उन्हें ट्रायल के लिए लाते हैं।

बालिका ने किसी खेल में नहीं दिया ट्रायल
12 से 18 फरवरी तक चले स्पोर्ट्स हॉस्टल के ट्रायल के लिए किसी भी बालिका ने आवेदन नहीं किया, न ही कोई बालिका ट्रायल के नाम पर स्टेडियम पहुंची। जबकि पिछले साल दो बालिकाओं का हॉस्टल के लिए चयन किया गया था। महज दो ही खेलों हॉकी व क्रिकेट के खिलाड़ियों ने ट्रायल में हिस्सा लेने का दमखम दिखाया। इसमें हॉकी के चार व क्रिकेट के आठ खिलाड़ियों का चयन किया गया।
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फिजिकल टेस्ट का पड़ा फर्क
हॉस्टल के ट्रायल में फिजिकल टेस्ट का भी बहुत बड़ा फर्क पड़ा है। करीब चार साल पहले जिलास्तरीय ट्रायल में फिजिकल टेस्ट नहीं होता था। स्किल टेस्ट लेकर ही खिलाड़ियों को भेज दिया जाता था। इससे मंडल स्तर के ट्रायल में भीड़ बढ़ जाती थी और वहां के फिजिकल टेस्ट में खिलाड़ी फेल भी हो जाते थे। इसी के चलते तत्कालीन खेल निदेशक अनीता भटनागर जैन ने जिला स्तरीय ट्रायल में ही फिजिकल टेस्ट शुरू करवा दिया था। इसके बाद से ट्रायल में खिलाड़ियों की संख्या में कमी आने लगी।
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