फर्रुखाबाद। आकांक्षात्मक ब्लाॅक राजेपुर सीएचसी में जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव पूर्व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए 20 किमी दूर जाना पड़ता है। सर्जन व एनेस्थेटिस्ट की सीएचसी में तैनाती के बावजूद डेढ़ वर्ष में मात्र 10 प्रसव कराए जा सके। वहीं, प्रति माह ऑपरेशन से पांच प्रसव कराने का लक्ष्य है।
शासन से आकांक्षात्मक ब्लाॅकों को सभी सरकारी योजनाओं से संतृप्त करने के आदेश हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं काफी बदहाल हैं। यहां लक्ष्य के अनुसार न टीकाकरण हो रहा है और न ही सरकारी अस्पताल में प्रसव। सीएचओ लक्ष्य के अनुसार मरीजों को टेलीमेडिसिन सेवा भी नहीं दे पा रहे हैं। डेढ़ वर्ष पूर्व सीएचसी राजेपुर को एफआरयू बनाकर यहां सर्जन सोनू सिंह और एनेस्थेटिस्ट डॉ.अमित वर्मा की तैनाती की गई। प्रति माह ऑपरेशन से पांच प्रसव कराने का लक्ष्य दिया गया।
सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था दी गई। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से विभाग से निजी सेंटर तय किया गया। जिम्मेदारों ने राजेपुर क्षेत्र में कोई अल्ट्रासाउंड सेंटर न होने से शहर से काफी दूर बघार स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर को संबद्ध किया। जो सीएचसी से करीब 20 किमी दूर है।
गर्भवती महिलाओं को वहां जाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभागीय कर्मचारियों के रुचि न लेने से अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव भी काफी कम कराए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि डेढ़ वर्ष में ऑपरेशन से मात्र 10 प्रसव ही कराए जा सके। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा लगाना काफी आसान होगा। हालांकि शासन से सीएचसी में अल्ट्रासांउड सेंटर खोलने की स्वीकृति मिलने से सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जगी है।
सीएचसी प्रभारी डॉ.आरिफ सिद्दीकी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में ऑपरेशन से पांच प्रसव कराए गए। इतने ही प्रसव गत वित्तीय वर्ष में कराए गए। लक्ष्य से काफी कम प्रसव होने से एएनएम व आशाओं को चेतावनी दी गई है। उन्होंने बताया कि सीएचसी में अल्ट्रासाउंड सेंटर की स्वीकृति मिलने की जानकारी मिली है। इसके साथ ही डॉक्टर की भी तैनाती होने पर मरीजों को इसका पूरा लाभ मिल सकेगा।