फर्रुखाबाद। सरकारी इमदाद के अभाव के बावजूद गंगा तट पर लगने वाले मेले से रामनगरिया समिति को प्रति वर्ष लाखों रुपये का लाभ होता है। वर्ष 2013 से समिति लगातार लाभ उठा रही है। विगत तीन वर्षों की आय पर नजर डाली जाए तो मेेला समिति ने करीब 40.39 लाख रुपये की कमाई की है। 33 साल पुरानी श्री रामनगरिया समिति अब करोड़पति हो गई है, जबकि कल्पवास करने वाले साधु-संत गत वर्षों तक सुविधाओं के लिए संघर्ष ही करते रहे हैं।
माघ मास में पतित पावनी मां गंगा के तट पर कल्पवास करने वाले साधु-संतों व कल्पवासियों का सिलसिला वर्षों पुराना है। वर्ष 1986 में राजनीतिक पहल पर मेला रानगरिया शुरू हुआ था। तब से स्थापित मेला रामनगरिया में पदेन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रति वर्ष चलता आ रहा है। मेला रामनगरिया ने मेले से आमदनी शुरू की जो अब तक जारी है।
मेला प्रबंधक संदीप दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2013 तक मेला से कोई विशेष लाभ नहीं होता था। इसके बाद से मेले ने आधुनिकता का रूप ले लिया। तब से बचत लाखों में होने लगी। अब मेला रामनगरिया समिति के पास एक करोड़ से अधिक धन खाते में जमा है। विगत तीन वर्षों की आमदनी पर नजर डाली जाए तो खर्चे निकाल कर वर्ष 2016 में 16 लाख 6 हजार 351 रुपये, वर्ष 2017 में 17 लाख 46 हजार 656 रुपये, वर्ष 2018 में 6 लाख 86 हजार 422 रुपये की बचत हुई थी। वर्ष 2018 में कम बचत के बाबत खर्चे को अधिक बताया गया, जबकि टेंडर वर्ष 2017 की अपेक्षा वर्ष 2018 में 37 लाख 20 हजार 380 रुपये अधिक के उठाए गए थे।
पहली बार वर्ष 2019 में टेंडर एक करोड़ 3 लाख 46 हजार के उठे हैं। इस बार भी मोटी आमदनी होने के आसार हैं। गौरतलब है कि हर वर्ष बचत होने के बावजूद कल्पवास करने वाले साधु-संत सुविधाओं के लिए संघर्ष ही करते नजर आते हैं। हालांकि इस बार प्रशासन कल्पवासियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पुरजोर कोशिश में लगा है।