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कंपोजिट ग्रांट खर्च में फर्जीबाड़े की होगी जांच

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विद्यालय में पूर्व में कराए गए काम को नया दिखाकर कंपोजिट ग्रांट से धनराशि निकालने का कई स्कूलों में खेल किया गया। यह मामला बीएसए के सामने आ गया है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कंपोजिट ग्रांट से कराए गए काम व खरीदी गई सामग्री के बिलों के साथ मौके पर सत्यापन करने का आदेश दिया है।
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वर्ष 2018-19 में प्राथमिक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 25 हजार से लेकर 75 हजार रुपये तक कंपोजिट ग्रांट के तहत धनराशि स्कूलों में भेजी गई थी। इसमें दस फीसदी धनराशि स्वच्छता पर खर्च होनी थी।

बकाया धनराशि से विद्यालय का फर्नीचर व टूट-फूट की मरम्मत कराई जानी थी। कई स्कूलों में पूर्व में प्रधान द्वारा जो काम कराया गया। उस काम को नया दिखाकर प्रधानाध्यापक ने फर्जी बिल बनवाकर कंपोजिट ग्रांट की धनराशि निकाल ली।
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इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कंपोजिट ग्रांट की धनराशि खर्च के बिलों की जांच करने का आदेश दिया है। बीएसए ने बताया कि कंपोजिट ग्रांट से जो सामग्री खरीदी गई, जो मरम्मत काम कराए गए, उन सभी की जांच बिलों के आधार पर कराई जाएगी।
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कंपोजिट ग्रांट खर्च में फर्जीवाड़े की होगी जांच

पूर्व में कराए गए काम को नया दिखाकर निकाल लिया गया धन
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