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Farrukhabad News: 16 दोषियों को सजा, गैर इरादतन हत्या में शिक्षक सहित आठ को आठ साल की जेल

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फर्रुखाबाद। पट्टे की जमीन विवाद में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अभिनितम उपाध्याय की अदालत ने बुधवार को 16 दोषियों को सजा सुनाई। एक पक्ष के आठ दोषियों को आठ वर्ष का कठोर कारावास और दूसरे पक्ष के आठ दोषियों को जानलेवा हमले के आरोप में पांच वर्ष का कठोर कारावास दिया गया। दोनों पक्षों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
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कमालगंज क्षेत्र के नगला दाऊद गांव में 10 जनवरी 2024 को जमीन विवाद में दो पक्ष लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से भिड़ गए थे। हमले में कई लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल तौहीद खां की 15 जनवरी 2024 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद मुकदमा गैर इरादतन हत्या की धारा में परिवर्तित किया गया। अदालत ने इन सभी को नौ जुलाई को दोषी ठहराया था। गैर इरादतन हत्या के मामले में शिक्षक वसीम, वसीम के भांजे आसिफ उर्फ मुन्ना, बाबर, अरशद उर्फ अक्कू, आमिर, ईशान, ममेरे भाई सादाब व तशरीफ शानू को आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे पक्ष से इदरीस, इदरीस के बेटे तमजीद, तमहीद, जुनैद, नाजिम, साले का बेटा आजम, शिक्षक भाई तौसीफ और साले का बेटा मगरूल को पांच वर्ष की सजा सुनाई।

विवेचक और दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर विचार करने की संस्तुति
अदालत ने मामले की विवेचना पर भी कड़ी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि जांच अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज, खून लगी मिट्टी और घायल के कपड़ों जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों का विधिवत संकलन नहीं किया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अदालत ने तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह और उपनिरीक्षक राजेश राय के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई पर विचार करने की संस्तुति की। साथ ही, जांच पूरी होने तक उन्हें किसी जघन्य अपराध की विवेचना न सौंपने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति एसपी को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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वीडियो फुटेज और मोबाइल लोकेशन बने अहम साक्ष्य
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी मोबाइल लोकेशन, वीडियो फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और घायल प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों से प्रमाणित हुई। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोनों मुकदमों में दोष सिद्ध हुए, जबकि कुछ धाराओं में साक्ष्य के अभाव में बरी भी किया गया।

दोनों पक्षों में शिक्षक भी पाए गए दोषी
घटना के दौरान दोषी वसीम कमालगंज के राजेपुर सरायमेदा में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे, वहीं दूसरे पक्ष के तौसीफ शमसाबाद थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर विद्यालय में अध्यापक थे।
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