जनपद में आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की हड़ताल का असर मिलाजुला रहा। कुछ निजी अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो सभी में रोज की तरह सामान्य तरीके से ओपीडी चली। कुछ निजी अस्पतालों में ओपीडी के मरीज इमरजेंसी में बैठकर डॉक्टरों ने देखे। इससे मरीजों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।
पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों से मारपीट के बाद इसको लेकर विरोध की आग यूपी तक पहुंच गई है। सोमवार को आईएमए के आह्वान पर देश भर में डॉक्टरों ने हड़ताल की घोषणा की थी। इसके बाद सोमवार को जनपद में हड़ताल का मिलाजुला असर रहा।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अनवरत जारी रहीं। कुछ निजी अस्पतालों को छोड़कर अधिकांश जगह ओपीडी में मरीज देखे गए। जहां ओपीडी बंद रही वहां इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं। वहीं पर डाक्टरों ने ओपीडी के मरीज देख लिए। इससे कुछ अस्पतालों में ओपीडी पूरी तरह बंद नजर आई। उधर फतेहगढ़ में डेंटल सर्जन डा.अहमद खां व डा. अहमद हुसैन खां ने अपने अस्पताल में चिकित्सीय सेवाएं ठप रखीं और कोलकाता की घटना की निंदा की।
लोहिया अस्पताल की औसतन ओपीडी 800 से 900 मरीजों की रहती है। वहीं सोमवार को इसमें हजार से 11000 तक पर्चे बन जाते हैं। सोमवार को भी लोहिया अस्पताल में 1082 मरीजों के ही पर्चे बने। इसी से पता चलता है कि जनपद में हड़ताल का विशेष असर नहीं रहा।