फर्रुखाबाद। रोडवेज बस स्टैंड की जगह पर बनीं अवैध दुकानें तोड़ने में बरती गई अफसरों की लापरवाही दुकानदारों के लिए संजीवन बन गई है। इसका फायदा उठाते हुए दुकानदार अब कोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं। हालांकि एआरएम ने भी विरोध में रिट दायर की है। न्यायालय में मामला पहुंचने के चलते दुकानें तोड़े जाने का मामला अब फिर लटक गया है।
वर्ष 2015 से फर्रुखाबाद रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निगम करीब 6.40 करोड़ से करवा रही है। बस स्टैंड की जगह पर गेट संख्या एक से लेकर दो तक करीब 27 अवैध दुकानें बनी हैं। परिवहन निगम ने दुकानें तोड़े जाने के लिए दुकानदारों को नोटिस जारी किए। यही नहीं 25 दुकानदारों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई, लेकिन दुकानदारों ने दुकानें नहीं खाली कीं। दो साल से दुकानों को तोड़े जाने की प्रक्रिया चल रही है लेकिन जिले के अफसरों पर दुकानदारों की पैरवी भारी पड़ रही है। एक-दो बार सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में परिवहन निगम के अफसरों ने पुलिसबल के साथ दुकानें तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करते हुए नापजोख कराई थी लेकिन दुकानदारों का विरोध भारी पड़ा। बाद में परिवहन निगम के अफसरों ने गेंद जिलाधिकारी के पाले में डाल दी। जिलाधिकारी भी इन अवैध दुकानों को अब तक नहीं तुड़वा सकी हैं।
सूत्रों की मानें तो रोडवेज बस अड्डा के बाहर बनी दुकानों के दुकानदारों ने कोर्ट की शरण ले ली है। मामला कोर्ट में चले जाने से अवैध दुकानें टूटने का मामला लटक गया है। रोडवेज बस स्टैंड फर्रुखाबाद का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। दुकानें न टूटने से रोडवेज बस स्टैंड का गेट व गंदे पानी के निकासी आदि में दिक्कत आएगी।
क्या कहते जिम्मेदार
रोडवेज बस स्टैंड की जमीन पर बनी अवैध दुकानों के दुकानदार कोर्ट में चले गए हैं। उन्होंने भी इसके विरोध में न्यायालय में रिट दाखिल की है। - विजय कुमार गंगवार (एआरएम)