अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। वर्ष 2017-18 की नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों को जलाने के प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। जांच टीम ने शनिवार को स्कूल पहुंच कर संचालित नि:शक्तों के आवासीय शिक्षा कैंप में रहने वालों से पूछताछ की। कोई भी जलाई किताबों के संबंध में बोलने को तैयार नहीं है। कुछ लोगों ने किताबों को जलता हुआ न देखने तक की बात कह दी है।
फतेहगढ़ स्थित नरेंद्र सरीन स्कूल में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का जिला स्तरीय भंडारण है। इसी परिसर में नि:शक्त बच्चों की आवासीय शिक्षा का एक्सीलेरेटेड लर्निंग कैंप भी संचालित होता है। 17 सितंबर सुबह वर्ष 2017-18 की नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों को जला दिया गया था। बीएसए रामसिंह व नगर शिक्षा अधिकारी सोमवीर सिंह मौके पर पहुंचे और दो किताबों को कब्जे में लिया था। डीएम ने इस प्रकरण की जांच के लिए तीन खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम बनाई।
एक खंड शिक्षा अधिकारी के अवकाश पर होने से खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार शुक्ल व बेगीश गोयल ने शनिवार को नरेंद्र सरीन स्कूल पहुंच कर जांच शुरू की। उन्होंने आवासीय शिक्षा कैंप के केयर टेकर व वहां रहने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की। कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं हुआ। जिस स्थान पर किताबें जलाई गईं। वहां का निरीक्षण करने पर देखा कि करीब 10 फीट ऊंचाई पर पेड़ की पत्तियां लपटों से झुलसी हुई थीं। दूसरी मंजिल पर बने कमरे में रखी भीगी किताबों को देखा। टीम के सदस्यों ने बताया कि जांच कर रिपोर्ट बीएसए को जल्द दी जाएगी।