अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में जांच कर रही प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों के खेल करने के मामले में स्टेटलिट्स कंपनी को हटाए जाने से करीब साढ़े 18 हजार आवेदन रद्दी हो गए हैं। अब आवेदनकर्ताओं से दोबारा अभिलेख मांगे जा रहे हैं। इसको लेकर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पीएम आवास योजना शहरी के तहत जिले की दो नगर पालिकाओं और चार नगर पंचायतों में आवास के लिए करीब 60 हजार आवेदन आनलाइन व आफलाइन जमा किए गए थे। सरकार ने इसकी जांच का जिम्मा स्टेटलिट्स कंपनी कोलकाता और स्नोफाउंटेन कंपनी लखनऊ को दिया था। स्टेटलिट्स कंपनी की जांच के दौरान लगातार खेल करने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके चलते डूडा ने करीब एक पखवारा पहले स्टेटलिट्स कंपनी कोलकाता को हटा दिया। सूत्रों की मानें तो जब स्टेटलिट्स कंपनी को हटाया गया तो उसके पास करीब 20 हजार आवेदन जांच के लिए थे, जिसमें से उसने 1259 आवेदन पत्रों की जांच कर डूडा कार्यालय को दे दिए थे। लेकिन स्टेटलिट्स कंपनी से जांच हटने के बाद वह 18741 आवेदन अपने साथ ही ले गई।
योजना के बारे में जानकारी करने के लिए कार्यालय आने वाले आवेदनकर्ताओं से दोबारा अभिलेख मांगे जा रहे हैं। बुधवार को डूडा कार्यालय पूजा राजपूत, शमा, अनीता देवी, देशराज और नफीसा बेगम आदि ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले आवेदन जमा किए थे। अब डूडा कर्मचारी दोबारा अभिलेख जमा करने की बात कह रहे हैं।
परियोजना अधिकारी जय विजय सिंह ने बताया कि पैसे मांगने की लगातार मिल रही शिकायतों के चलते स्टेटलिट्स कंपनी को हटा दिया गया है। इसके चलते जो फार्म उसके पास थी। वह कार्यालय में नहीं है। इन्हीं लोगों से दोबारा अभिलेख मांगे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब स्टेटलिट्स के बजाय जैश प्राइवेट कंपनी गुजरात जांच करेगी।