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एंबुलेंस के अभाव में अस्पताल में तड़पती रही गर्भवती

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अमर उजाला ब्यूरो
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कायमगंज (फर्रुखाबाद)। कंपिल थाना क्षेत्र के गांव खजुन्ना नगला निवासी गर्भवती महिला सीएचसी के महिला वार्ड की गैलरी में एंबुलेंस के अभाव में तीन घंटे तक तड़पती रही। अधीक्षक की नजर पड़ने पर उन्होंने स्टाफ नर्स को फटकार लगाई। इसके बाद महिला को एंबुलेंस से नाजुक हालत में लोहिया अस्पताल भेजा गया।

गांव खजुन्ना नगला निवासी दिव्यांग वीरपाल की गर्भवती पत्नी पुष्पा देवी को करीब बाहर बजे सीएचसी लाया गया। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने महिला को भर्ती कर लिया। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को रेफर कर दिया गया। गर्भवती महिला के सथ आए परिजनों ने 102 व 108 एंबुलेंस को कई बार कॉल लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्टाफ नर्स ने गर्भवती को रेफर करने के बाद वार्ड से बाहर कर दिया। परिजन उसे स्ट्रेचर पर लिटा कर गैलरी में ले आए। स्ट्रेचर पर ही ड्रिप चलती रही। गर्भवती की सास पुष्पादेवी हाथ में ग्लूकोज की बोतल पकड़े रहीं।
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परिजन वाहन की तलाश में इधर-उधर दौड़ते रहे। इस दौरान गर्भवती की हालत बिगड़ती गई। वह स्ट्रेचर पर लगभग तीन घंटे तड़पती रही। स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मचारी ने उसकी पीड़ा की ओर ध्यान नहीं दिया। किसी तरह जब चिकित्साधीक्षक डा. अनुराग वर्मा को जानकारी हुई तो वह वहां पहुंचे। उन्होंने गर्भवती को तड़पता देखा तो उन्होंने स्टाफ नर्स को फटकार लगाई। कहा कि जब एंबुलेंस नहीं आई तो गर्भवती को वार्ड से बाहर क्यूं किया। कुछ देर बाद एंबुलेंस आ गई। गर्भवती को नाजुक हालत में लोहिया अस्पताल ले जाया गया। गर्भवती के परिजनों ने बताया कि महिला का पति दिव्यांग है। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। घर से चलते समय एंबुलेंस को कॉल की थी, तब भी एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची। किसी तरह उन्होंने किराए पर टेंपो लिया और अस्पताल लेकर पहुंचे। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक ने बताया कि एंबुलेंस के संदर्भ में वह कुछ नहीं कह सकते हैं। वह कॉल सेंटर से ही उपलब्ध होती है। लेकिन स्टाफ नर्स को गर्भवती को वार्ड से बाहर नहीं करना चाहिए था।
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