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महिला बंदी भी अब बनेंगी हुनरमंद

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अमर उजाला ब्यूरो
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फर्रुखाबाद। जिला जेल में बंद महिला बंदी भी हुनरमंद बनेंगी। इन बंदियों को राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की ओर से जेल के अंदर ही सिलाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए 20 महिला बंदियों को चिह्नित कर समूह बना लिया गया। समूह का बैंक में खाता भी खोल दिया गया है। जेल प्रशासन से चिह्नित महिला बंदियों के आधार कार्ड उपलब्ध कराने को कहा गया। आधार कार्ड मिलते ही महिला बंदियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाएगा।
जिला जेल में सजा काट रहीं महिला बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन ने कदम बढ़ाए हैं। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत इन महिला बंदियों को जल्द ही सिलाई व ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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बताते हैं कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अफसरों ने जिला जेल में जाकर बंदियों के सामने प्रशिक्षण का प्रस्ताव रखा। पहले तो महिला बंदियों ने प्रशिक्षण लेने से इनकार कर दिया लेकिन जब अफसरों ने काफी समझाया तो वह प्रशिक्षण लेने के लिए राजी हो गईं। महिला बंदियों को जरदोजी, ब्लाक प्रिंटिंग, सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देने की पेशकश की गई तो महिला बंदियों ने सिलाई व ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण लेने की हामी भर दी। करीब एक पखवारा पहले अफसरों ने 20 महिला बंदियों को चिह्नित कर महादेवी बंदी महिला स्वयं सहायता समूह गठित कर लिया और उनका खाता भी खोल दिया। आधार कार्ड मिलते ही महिला बंदियों को सिलाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देना शुरू किया जाएगा।

तीन से छह माह का होगा प्रशिक्षण
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की सिटी मिशन प्रबंधक मेघा गुप्ता ने बताया कि महिला बंदियों को प्रशिक्षण देने के लिए संस्था का चयन किया जा रहा है। जल्द ही महिला बंदियों को सिलाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देना शुरू कराया जाएगा। तीन से छह माह का प्रशिक्षण होगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बंदी महिलाओं को जेल में ही सरकारी स्कूल के बच्चों की ड्रेसों व अन्य चीजें सिलने के लिए दी जाएंगी। इसका उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाएगा।
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रिवाल्विंग फंड भी दिया जाएगा
जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) के परियोजना अधिकारी जय विजय सिंह ने बताया कि जिला जेल में बंद महिला बंदियों के समूह को प्रशिक्षण के दौरान रिवाल्विंग फंड भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण लेने के बाद महिला बंदी भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगी। पहले तो महिलाओं ने प्रशिक्षण लेने से मना किया लेकिन जब उन्हें गहनता से समझाया गया तो वह मान गईं।
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