यंगिस्तान को लालच नहीं, ठोस रोजगार की नीति चाहिए। यह मुद्दा सबकी जुबान पर था। छात्र/छात्राओं की समस्याएं तो बहुत हैं लेकिन कॉलेज के बाद बेरोजगारी की अंधेरी गली की चिंता सबसे अधिक साल रही है।
पढ़ाई-लिखाई पूरी होते ही नौकरी के संकट में पड़ जाने को यंगिस्तान ने बेहद दुखदाई बताया। सही ढंग से रोजगार नीति पर सत्तासीन सरकारों के अमल नहीं किए जाने से इस प्रकार की परेशानी विकराल रूप धारण करती जा रही है जबकि नेता लॉलीपॉप देने में ही अपनी ऊर्जा को लगा दे रहे हैं।
अमर उजाला ने शुक्रवार को अयोध्या के साकेत महाविद्यालय में कैंपस अड्डा का आयोजन किया, जिसमें यंगिस्तान ने खुलकर बेबकी से अपनी राय रखी। आरक्षण व्यवस्था पर भी छात्रों ने खुलकर बोला। स्वच्छता अभियान को सिर्फ रस्म अदायगी भर बताया गया जबकि स्वच्छता का स्वस्थ होने से गहरा रिश्ता है और व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तो सुखी रहेगा लेकिन यह कड़ी टूट सी गई है।
एक छात्रा ने कहा कि आखिरकार जिस व्यवस्था को सिर्फ कुछ ही वर्षों के लिए लागू किया गया था जिससे कि जो लोग विकास की गति में पीछे हैं, वह बराबर आ जाए लेकिन आज तक उस आरक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया।
योग्यता के दरकिनार किए जाने से पैदा हो रही हीनता भाव को देश के लिए खतरनाक बताते हुए योग्यता के अनुसार काम मिलने का मांग की गई। प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर पैदा किए जाने की मांग एक छात्रा ने की।
जॉब ओरिएंटेड कोर्स को तवज्जो देने की मांग करते हुए एक युवा ने कहा कि इस प्रकार के पाठयक्रम होने से पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार मिलने की संभावना ज्यादा हो जाती है। इसलिए एमएलए ऐसा हो जो जॉब ओरिएंटेड कोर्स को शैक्षणिक संस्थानों में लाने में मदद करे।
ऐतिहासिक इमारतों के सौंदर्य में छीजन को इतिहास के प्रति लापरवाही बताते हुए एक छात्रा ने कहा कि जो भी हमारी धरोहरे हैं, उसे सहेज कर रखे जाने की जरूरत है जिससे हम अगली पीढ़ी को अच्छे ढंग से स्थानांतरित कर सके। अयोध्या में गंदगी का मुददा उठा। अयोध्या को स्वच्छ किए जाने की मांग बेहद मजबूती से की गई।